September 5, 2026

IRCTC घोटाले में फिर टला फैसला, 9 जून को सुनवाई, लालू-राबड़ी, तेजस्वी आरोपी हैं

IRCTC घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आज दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने फिर फैसला टाल दिया है। इस मामले में अब 9 जून को आरोप तय पर आदेश सुनाया जाएगा। इस मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती समेत कई आरोपियों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई की है। पिछली सुनवाई 6 मई को हुई थी, लेकिन उस दिन अदालत ने फैसला नहीं सुनाया था। कोर्ट पहले ही आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी कर चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय ने लालू यादव परिवार के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। चार्जशीट में लालू प्रसाद यादव समेत राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।

आरजेडी चीफ लालू यादव से जुड़ा यह मामला उस दौर का है, जब वह केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल में IRCTC के अंतर्गत आने वाले रांची और पुरी के दो होटलों के टेंडर आवंटन में अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसियों का दावा है कि होटलों और उनसे जुड़ी जमीनों को नियमों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को पट्टे पर दिया गया, जिससे कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचा। इस मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि कथित टेंडर घोटाले की साजिश लालू यादव की जानकारी में रची गई थी।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने आदेश में माना कि टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप हुआ और इससे परिवार को आर्थिक लाभ पहुंचने के आरोप सामने आए। इसी आधार पर कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजसवी यादव, मीसा भारती, तेज प्रताप यादव समेत कई के खिलाफ मुकदमा चलाने का फैसला सुनाया था।

IRCTC घोटाला 2004 से 2009 के बीच का है। जब लालू यादव यूपीए सरकार में रेलमंत्री थे। उस दौरान भारतीय रेलवे ने रांची और पुरी स्थित बीएनआर होटलों को आईआरसीटीसी के माध्यम से लीज पर देने का फैसला किया था। जांच एजेंसी सीबीआई के अनुसार, होटलों के ठेके आवंटन की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को ठेका दिया गया। इसके बदले कथित तौर पर लालू परिवार को पटना में बेशकीमती जमीन हस्तांतरित की गई।

सीबीआई का दावा है कि विनय कोचर और विजय कोचरको लाभ पहुंचाने के एवज में करीब तीन एकड़ जमीन लालू परिवार से जुड़ी कंपनी को दी गई। जांच के मुताबिक, यह जमीन डिलाइट मार्केटिंग लिमिटेड से लारा प्रोजेक्ट्स के नाम मात्र 65 लाख रुपये में ट्रांसफर की गई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, जिस जमीन का सौदा हुआ उसका बाजार मूल्य लगभग 94 करोड़ रुपये बताया गया, जबकि सर्कल रेट करीब 32 करोड़ रुपये था। आरोप है कि यह पूरा लेन-देन सत्ता के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का उदाहरण था, जिसमें सरकारी प्रभाव का इस्तेमाल कर निजी लाभ हासिल किया गया।

 

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