August 7, 2026

RSS बैकग्राउंड और सपा के गढ़ में मजबूत, इस दलित नेता को UP अध्यक्ष बना सकती है भाजपा

BJP may make this Dalit leader the UP president

BJP may make this Dalit leader the UP president : रामशंकर कठेरिया का नाम भी फिलहाल चर्चा में है। उनकी दावेदारी इसलिए मजबूत मानी जा रही है क्योंकि वह यूपी में गुटबाजी से परे हैं और इटावा के रहने वाले दलित नेता हैं। वह इटावा के सांसद रहे हैं और फिलहाल किसी अहम जिम्मेदारी से दूर हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में लगातार देरी हो रही है। कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्य में अध्यक्ष का चुनाव पहले होगा और उसके बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष पर मुहर लगेगी। इस बीच यूपी भाजपा अध्यक्ष को लेकर भी कयास जोरों पर हैं। शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस मसले पर कुछ भी कहा नहीं जा रहा है, लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच कई नामों पर चर्चा है। चर्चा है कि पार्टी की ओर से किसी ब्राह्मण, ओबीसी या फिर दलित नेता के नाम पर मुहर लग सकती है। लेकिन पूरा जोर इस बात पर है कि ऐसे लीडर पर सहमति बनाई जाए, जो वैचारिक रूप से मजबूत हो और आरएसएस के बैकग्राउंड वाला हो।

now bjp up president could from dalit community 3 names in race UP में कोई दलित नेता बनेगा भाजपा अध्यक्ष! चर्चा में तीन नाम, अखिलेश यादव के PDA की होगी काट, India News in Hindi - Hindustan

ऐसे ही एक नेता रामशंकर कठेरिया का नाम भी फिलहाल चर्चा में है। उनकी दावेदारी इसलिए मजबूत मानी जा रही है क्योंकि वह यूपी में गुटबाजी से परे हैं और इटावा के रहने वाले दलित नेता हैं। वह इटावा के सांसद रहे हैं और फिलहाल किसी अहम जिम्मेदारी से दूर हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर संगठन को मजबूत किया जा सकता है। उनके पक्ष में यह है कि वह इटावा के ही रहने वाले हैं, जहां से समाजवादी पार्टी का उभार हुआ था। इटावा, मैनपुरी, एटा समेत आसपास के कई जिलों को सपा का गढ़ माना जाता है। इसलिए यदि वह यादव बेल्ट में संगठन को मजबूत करते हैं तो बड़ी सफलता होगी।

इसके अलावा पूरे प्रदेश में नैरेटिव को मजबूत करने में भी सफलता मिलेगी। सपा की ओर से पीडीए का दांव चला जा रहा है। लोहियावादियों और आंबेडकरवादियों को वह साथ लाना चाहती है। ऐसी स्थिति में भाजपा चाहेगी कि दलित लीडर को मौका देकर सपा के प्रचार को कमजोर किया जाए। कठेरिया के पक्ष में यह बात भी है कि वह 13 सालों तक आरएसएस के प्रचारक रहे हैं। दलित चेतना पर उनका लंबा अध्ययन रहा है और वह हिंदी के प्रोफेसर के तौर पर आगरा में पढ़ा चुके हैं। इस तरह इटावा से लेकर आगरा तक वह मजबूत उपस्थिति रखते हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ पूर्वी यूपी से हैं तो वहीं डिप्टी सीएम केशव मौर्य प्रयाग क्षेत्र से आते हैं।

इसके अलावा डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक लखनऊ का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस लिहाज से कठेरिया को बनाकर भाजपा यादव बेल्ट में सेंध मारना चाहेगी। उनके पास संगठन का अनुभव भी है क्योंकि वह भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं। केंद्र सरकार में राज्य मंत्री भी वह थे। फिलहाल उनके अनुभव के लिहाज से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद पर उन्हें बिठा सकती है।

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