Wednesday, March 25, 2026

बिहार में वोटर लिस्ट से कटे मुसलमानों के नाम? SIR से जुड़े सवालों का चुनाव आयोग ने दिया जवाब

Bihar Breaking India News Politics

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट का गहन पुनरीक्षण कराया था। इसके बाद नई वोटर लिस्ट जारी होने के बाद आयोग ने चुनाव का ऐलान किया गया। इसको लेकर कई सवाल भी उठे और आरोप लगाया गया कि वोटर लिस्ट से मुसलमानों के नामों को एक साजिश के तौर पर काटा गया। इस पर चुनाव आयोग की तरफ से जवाब आया जिसमें कहा गया कि एसआईआर पूरी तरह से सटीक है।

चुनाव आयोग ने गुरुवार को कहा कि बिहार में SIR की प्रक्रिया पूरी तरह से सटीक थी। चुनाव आयोग ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष दायर एक हलफनामे में यह टिप्पणी की, जो एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (एडीआर) और कार्यकर्ता योगेंद्र यादव जैसे याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि अंतिम मतदाता सूची में मुसलमानों को अनुपातहीन रूप से बाहर रखा गया है।

चुनाव आयोग ने कहा है कि याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मुसलमानों का अनुपातहीन बहिष्कार किया गया है। यह नाम पहचान के लिए किसी सॉफ़्टवेयर पर आधारित है, जिसकी प्रामाणिकता, सटीकता या उपयुक्तता पर टिप्पणी नहीं की जा सकती। इस सांप्रदायिक दृष्टिकोण की निंदा की जानी चाहिए। मतदाता सूची डेटाबेस किसी भी मतदाता के धर्म के बारे में कोई जानकारी एकत्र नहीं करता है।

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को अंतिम रूप देने में राजनीतिक दलों, “लोकहितैषी” व्यक्तियों और संगठनों के सीमित योगदान पर भी चिंता जताई। आयोग ने कहा, “मतदाता सूची को अंतिम रूप देने में सभी हितधारकों की सहभागिता शामिल होती है, और एसआईआर इसी मूल सिद्धांत पर आधारित है।

चुनाव आयोग ने कहा कि जहां मतदाता सूची को सटीक रूप से अंतिम रूप देना निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) का कर्तव्य है, वहीं मतदाताओं और प्रतियोगी राजनीतिक दलों, विशेष रूप से मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों का भी यह कर्तव्य है कि वे यह सुनिश्चित करने में सक्रिय रूप से भाग लें कि अंतिम मतदाता सूची यथासंभव समावेशी और सटीक हो।

चुनाव आयोग ने कहा कि माननीय न्यायालय में प्रस्तुत विभिन्न नोटों से संकेत मिलता है कि बूथ स्तरीय एजेंटों की नियुक्ति को छोड़कर, राजनीतिक दलों और जनहितैषी व्यक्तियों व संगठनों ने यह सुनिश्चित करने में कोई ठोस योगदान नहीं दिया कि सभी पात्र मतदाताओं को अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाए। राजनीतिक दलों और याचिकाकर्ताओं का दृष्टिकोण चुनाव आयोग पर आरोप लगाना और एसआईआर प्रक्रिया में त्रुटियाँ बताने का रहा है।

 

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *