अक्टूबर यानी कल से छठ के महापर्व की शुरुआत हो चुकी है। पहला दिन नहाय खाय के साथ शुरू हुआ। छठ महापर्व के दूसरे दिन पर खरना पूजन होती है, जिसे बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। चार दिवसीय चलने वाले इस पूजा का विशेष महत्व बिहार में है। वहीं झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में इसे पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। पूजा के दौरान उपयोग में लाई गई हर एक छोटी से छोटी वस्तु का भी विशेष महत्व होता है। कुछ चीजों के बिना तो ये पूजा ही अधूरी ही लगेगी। इनमें से एक चीज है सुपा। आमतौर पर लोग बांस वाले सुपे का इस्तेमाल करते हैं। वहीं कुछ लोग पीतल के बने सूपे को भी पूजा में शामिल करने में लगे हैं। ऐसे में कई बार लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर कौन सा सुपा छठ पूजा के लिए सबसे सही है?
हिंदू धर्म की मान्यता के हिसाब से बांस के सुपे का सबसे ज्यादा महत्व होता है। इसे नेचुरल, शुद्ध और सात्विक माना जाता है। पूजा-पाठ या शादी की रस्मों में भी बांस से बने सुपे का ही इस्तेमाल होता है। छठ की पूजा में बांस से बने सुपे को शामिल करना बेहद ही शुभ मानते हैं। छठ की पूजा घर की खुशहाली और संतान की दीर्घायु के लिए होती है। ऐसी मान्यता है कि बांस जैसे-जैसे जल्दी बढ़ता है। ठीक वैसे ही घर की खुशियां और संतान की तरक्की बढ़ती है। इस सुपा में ही प्रसाद और फल इत्यादि को रखकर सूर्यदेव को सब कुछ अर्पित किया जाता है।
नए जमाने के लोग अब छठ की पूजा में पीतल के सुपे का भी प्रयोग करने लगे हैं। देखा जाए तो पूजा-पाठ में पीतल के बर्तन को काफी शुभ माना जाता है। ऐसे में छठ पूजा में पीतल के सुपे को शामिल करना गलत नहीं है। इसे सूर्य का धातु भी कहा जाता है। पीतल को धन, वैभव और लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। छठ पूजा में पीतल के सुपे से अर्घ्य देना भी उतना ही शुभ है जितना बांस के सुपे से। ऐसे में अपनी-अपनी पसंद के हिसाब से किसी भी तरह के सुपे का इस्तेमाल किया जा सकता है।

