अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत का नाम लेकर एक बार फिर शेखी बघारी है। ट्रंप ने दावा किया है कि भारत ने अमेरिका से 68 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर ऑर्डर किए थे, लेकिन उनकी डिलीवरी में देरी हो गई और इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को खुद उनसे मिलने की इजाजत मांगनी पड़ी। हालांकि ट्रंप का यह दावा सच्चाई से कोसों दूर है। हकीकत यह है कि भारत ने अमेरिका से अब तक कुल मिलाकर सिर्फ 28 अपाचे हेलिकॉप्टर खरीदे ही थे और दिसंबर 2025 तक इन सभी की डिलीवरी पूरी हो चुकी है।
इससे पहले एक कार्यक्रम में बोलते हुए ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बातचीत का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “भारत मेरे पास आया कि वे 5 साल से इंतजार कर रहे हैं और हम इसे बदल रहे हैं। भारत ने 68 अपाचे हेलीकॉप्टर ऑर्डर किए थे। पीएम मोदी मेरे पास आए और कहा ‘सर क्या मैं आपसे मिल सकता हूं’ और मैंने हां कहा।”
हालांकि टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक रिपोर्ट में बताया है कि आधिकारिक समझौतों, डिलीवरी रिकॉर्ड, तैनाती की जानकारी और सैन्य और कूटनीतिक सूत्रों से बातचीत के बाद यह सामने आई है कि ट्रंप का यह दावा गलत है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने अमेरिका से दो अलग-अलग चरणों में अपाचे हेलिकॉप्टर की खरीद की थी। पहला सौदा सितंबर 2015 में हुआ था, जब ओबामा प्रशासन के अंतिम दौर में भारत ने भारतीय वायुसेना के लिए 22 अपाचे हेलिकॉप्टर खरीदने का समझौता किया। इस सौदे की कीमत करीब 2.2 अरब डॉलर थी। अमेरिका से इन हेलिकॉप्टरों की डिलीवरी तय समय पर हुई थी और 2020 तक सभी हेलिकॉप्टर भारत पहुंच गए। बाद में इन हेलीकॉप्टरों को वायुसेना की दो अग्रिम स्क्वाड्रनों में शामिल किया गया।
वहीं दूसरा सौदा फरवरी 2020 में हुआ, जब डोनाल्ड ट्रंप भारत दौरे पर आए थे। इस सौदे के तहत भारतीय सेना के लिए छह अपाचे हेलिकॉप्टर खरीदे गए। सौदे की कीमत 60 से 80 करोड़ डॉलर के बीच थी। इस ऑर्डर में बार बार देरी हुई। फरवरी 2025 में वाइट हाउस यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने भी इस देरी का जिक्र किया था। दोनों सौदों को मिलाकर देखा जाए तो भारत ने कुल 28 हेलिकॉप्टर खरीदे थे, जो ट्रंप के बताए आंकड़े से आधे से भी कम है।
रिपोर्ट के मुताबिक जहां वायुसेना के अपाचे समय पर मिल गए थे, वहीं सेना के छह हेलिकॉप्टरों की डिलीवरी में काफी देरी हुई। इनकी आपूर्ति की शुरुआत 2024 की शुरुआत में होनी थी, लेकिन पहला बैच जुलाई 2025 में पहुंचा, यानी करीब 15 महीने की देरी से। आखिरी तीन हेलिकॉप्टर दिसंबर 2025 में मिले और इस तरह पूरा ऑर्डर लगभग दो साल देरी से पूरा हुआ।
इस देरी के पीछे कई वजहें रहीं। अमेरिका के एरिजोना स्थित बोइंग के अपाचे प्रोडक्शन प्लांट में कोरोना महामारी के बाद सप्लाई चेन की दिक्कतें आईं। वहीं इंजन, गियरबॉक्स और खास इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की कमी हुई। कुछ तकनीकी और लॉजिस्टिक समस्याएं भी सामने आई थीं। बिजली और पावर जेनरेशन से जुड़ी चिंताओं के चलते बोइंग को कुछ समय के लिए दुनिया भर में इसके अलावा नवंबर 2025 में भारत भेजे जा रहे आखिरी बैच को तब और देरी झेलनी पड़ी, जब तुर्की ने अपाचे हेलिकॉप्टर ले जा रहे एंटोनोव-124 विमान को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की इजाजत नहीं दी। विमान को बीच रास्ते से लौटना पड़ा, जिससे कई हफ्तों की और देरी हो गई।
अपाचे की ताकत के बावजूद अमेरिका की सप्लाई चेन से जुड़ी दिक्कतों और चीन-पाकिस्तान को लेकर बदलती अमेरिकी रणनीति के अनुभवों के चलते भारत अब अमेरिकी निर्भरता से धीरे-धीरे दूरी बना रहा है। भारत ‘मेक इन इंडिया’ नीति के तहत स्वदेशी विकल्पों पर ज्यादा भरोसा कर रहा है। इसी दिशा में भारत हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ पर जोर दे रहा है। यह हेलिकॉप्टर ऊंचे इलाकों के लिए बेहतर है और 20 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई पर भी काम कर सकता है, जहां भारी अपाचे को दिक्कत होती है। भारत सेना और वायुसेना में 156 प्रचंड हेलिकॉप्टर शामिल करने की योजना बना रहा है।

