आईएएस-पीसीएस कोचिंग के लिए भर्ती में खेल, कई अधिकारियों पर लटकी एक्शन की तलवार

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यूपी में आईएएस-पीसीएस की फ्री कोचिंग की समाज कल्याण विभाग की अभ्युदय कोचिंग में कोर्स कोआर्डिनेटरों की भर्ती में बड़ा खेल सामने आया है। अभ्यर्थियों की पात्रता व अभिलेखों की जांच के लिए बनी तीन विभागीय कमेटियों की आंख में धूल झोंक कर आउटसोर्सिंग कंपनी ने अयोग्य अभ्यर्थियों की भर्ती कर ली। जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। अब अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। पूरा मामला सामने आने के बाद अब कई अधिकारियों पर एक्शन की तलवार लटक गई है। कई लोगों को निबटना तय माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत 69 कोर्स कोआर्डिनेटर भर्ती किए गए। प्रत्येक जिले में 60 हजार रुपये मासिक मानदेय पर एक-एक कोर्स कोआर्डिनेटर रखा गया। पद पर भर्ती के लिए अभ्यर्थी को पीसीएस की मुख्य परीक्षा पास करना अनिवार्य था। 48 कोर्स कोआर्डिनेटर बिना अर्हता पूरी किए ही भर्ती किए गए। दो वर्ष पूर्व यह नियुक्ति की गई। विभाग में आउटसोर्सिंग के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए अर्हता तय करने, अभिलेखों की जांच व साक्षात्कार की प्रक्रिया इत्यादि के लिए तीन कमेटियां गठित हैं। समाज कल्याण विभाग की ओर से बनाईं गईं कमेटियों में से एक कमेटी में संयुक्त निदेशक आरके सिंह व जिला समाज कल्याण अधिकारी पवन यादव व एक अन्य अधिकारी शामिल हैं।

दूसरी कमेटी में संयुक्त निदेशक एसके विसेन, जिला समाज कल्याण अधिकारी अनामिका सिंह व जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवम सागर और तीसरी कमेटी उप निदेशक सुनीता यादव सहित अन्य शामिल हैं। दो वर्ष पूर्व हुईं इन पदों पर पारदर्शी नियुक्ति की जिम्मेदारी इन्हीं कमेटियों के जिम्मे थी। संयुक्त निदेशक आरके सिंह रिटायर हो गए हैं और संयुक्त निदेशक एसके विसेन बीमारी के कारण अवकाश पर हैं।

अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर आउटसोर्सिंग कंपनी अवनि परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड ने किस तरह मनमाने ढंग से अयोग्य अभ्यर्थियों की भर्ती कर ली। कमेटी ने अपना कार्य करने की बजाए सब कुछ आउटसोर्सिंग कंपनी के ही भरोसे छोड़ दिया। अब अधिकारी आउटसोर्सिंग कंपनी पर ठीकरा फोड़ रहे हैं और आउटसोर्सिंग कंपनी अधिकारियों पर इल्जाम लगा रही है। अब विभाग में आउटसोर्सिंग पर विभिन्न पदों पर हुई भर्तियों की जांच की जाएगी। जल्द कमेटी का गठन कर जांच होगी

अब प्रशासनिक जांच में कई जिम्मेदार अधिकारियों का निपटना तय माना जा रहा है। आखिर आउटसोर्सिंग कंपनी के भरोसे किस तरह विभाग में कोर्स कोआर्डिनेटरों के पदों पर भर्ती हो गई। यह पूरी व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। आगे किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो इसलिए विभाग की ओर से जांच के बाद सख्त कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।

कोर्स कोआर्डिनेटरों की भर्ती में गड़बड़ी सामने आने के बाद अब कंप्यूटर ऑपरेटरों की भर्ती में भी गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ रही हैं। कंप्यूटर ऑपरेटर भर्ती में अभिलेखों का ढंग से सत्यापन नहीं हुआ। फिलहाल अब जांच होने के बाद सही तस्वीर सामने आएगी।

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