यूपी में मेरठ जिले के कपसाड़ गांव में हुई दलित महिला की हत्या और बेटी के अपहरण के बाद शनिवार को सियासी पारा चढ़ गया है। पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को पुलिस ने काशी टोल प्लाजा पर रोक दिया गया, जिसके बाद वहां भारी हंगामा और धरना प्रदर्शन शुरू हो गया।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद रामजीलाल सुमन के साथ विधायक अतुल प्रधान को जैसे ही पुलिस ने टोल पर रोका, वे अपने समर्थकों के साथ वहीं जमीन पर धरने पर बैठ गए। सपा नेताओं का आरोप है कि प्रशासन विपक्ष को पीड़ित परिवार का दर्द साझा करने से रोक रहा है। उनकी मांग है कि दोषियों को तत्काल फांसी की सजा दी जाए और परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिले।
वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव प्रदीप नरवाल को भी पुलिस ने काशी टोल पर ही रोक लिया। इस दौरान कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। नरवाल ने कड़े तेवर दिखाते हुए पुलिस प्रशासन को आधे घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि, अगर आधे घंटे के भीतर पुलिस हमें साथ लेकर पीड़ित परिवार तक नहीं पहुंचती, तो हम बैरिकेडिंग तोड़कर खुद कपसाड़ की ओर कूच करेंगे।
विपक्ष के इस कड़े रुख को देखते हुए टोल प्लाजा और कपसाड़ गांव के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। आला अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और नेताओं को समझाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि जिले की कानून-व्यवस्था न बिगड़े। फिलहाल टोल प्लाजा पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

