August 6, 2026

मैं खुद को संभाल नहीं पाई…जयपुर के मंदिर में फूट-फूटकर रोईं बिहार की विधायक मैथिली ठाकुर

बिहार के मधुबनी की बेटी, प्रख्यात लोक गायिका और दरभंगा के अलीनगर से भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर जब जयपुर के ऐतिहासिक गोविंददेवजी मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचीं, तो वहां का भक्तिमय माहौल उन्हें इतना भावुक कर गया कि उनकी आंखों से आंसू बह निकले। मंदिर में गूंज रहे भजनों, घंटियों और तालियों की धुन ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण बनाया कि वे खुद को संभाल नहीं पाईं। इस भावुक पल का वीडियो और उनकी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

मैथिली ठाकुर अपने दोनों भाइयों ऋषभ और अयाची ठाकुर के साथ मंदिर पहुंची थीं। जैसे ही मंदिर परिसर में भजन गूंजा— “आज तो नवेली राधा गोरल पूजण आई छै, गोरल पूजण आई छै…”—तो वहां मौजूद भक्तिमय वातावरण ने उन्हें भीतर तक छू लिया। भजन की धुन, भक्तों की भक्ति और मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच मैथिली की आंखें नम हो गईं।

मंदिर में मौजूद श्रद्धालु भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे। कई लोगों ने इस पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर हो रहा है।

गोविंददेवजी मंदिर में दर्शन के बाद मैथिली ठाकुर ने अपने फेसबुक अकाउंट पर भी इस अनुभव को साझा किया। उन्होंने लिखा—

“आज तक मैंने ऐसा कभी महसूस नहीं किया था। लेकिन जब मैं गोविंद देव जी मंदिर, जयपुर में दर्शन के लिए पहुंची, तो वहां का वातावरण, भक्तों के भजन, घंटियों और तालियों की गूंज ने मन को इतना छू लिया कि मैं खुद को संभाल नहीं पाई। आंखों से आंसू बहते रहे, ऐसा लगा जैसे मन का सारा बोझ हल्का हो गया हो।”

मैथिली के इस भावुक पोस्ट पर हजारों लोगों ने प्रतिक्रिया दी और इसे सच्ची भक्ति का भाव बताया।

मैथिली ठाकुर केवल एक लोकप्रिय लोकगायिका ही नहीं हैं, बल्कि अब सक्रिय राजनीति में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। बिहार के मधुबनी जिले में जन्मी मैथिली ने बहुत कम उम्र में ही अपनी गायकी से पहचान बना ली थी। मैथिली, भोजपुरी और हिंदी में गाए गए उनके पारंपरिक लोकगीत देश-विदेश में बेहद लोकप्रिय हैं।

बीते वर्ष उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर विधायक बनीं। इसके साथ ही वे संगीत और राजनीति—दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहने वाली नई पीढ़ी की प्रतिनिधि बन गई हैं।

मैथिली ठाकुर इन दिनों जयपुर में आयोजित ‘यूनिक रंग राजस्थान रंग रथ यात्रा’ कार्यक्रम में भाग लेने आई हुई हैं। यह कार्यक्रम राजस्थान की लोक संस्कृति और कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान उनका एक बड़ा म्यूजिक कंसर्ट भी प्रस्तावित है, जिसमें वे अपने लोकप्रिय लोकगीतों और भजनों की प्रस्तुति देंगी। आयोजकों का कहना है कि इस कंसर्ट में बड़ी संख्या में संगीत प्रेमियों के पहुंचने की उम्मीद है।

जयपुर प्रवास के दौरान मैथिली ठाकुर ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से भी मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा—

“अपनी सुरीली आवाज से भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने वाली, बिहार से युवा विधायक मैथिली ठाकुर जी ने आज मुख्यमंत्री निवास पर भेंट की।”

मुख्यमंत्री ने आगे लिखा कि इस अवसर पर राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक कलाओं के संरक्षण तथा संवर्धन को लेकर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि युवा प्रतिभाओं का अपनी जड़ों से जुड़ाव बेहद सराहनीय है।

जयपुर के गोविंददेवजी मंदिर में मैथिली ठाकुर का भावुक होना केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि भक्ति और संगीत के गहरे संबंध का भी उदाहरण माना जा रहा है। लोकगायिका होने के कारण संगीत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है और मंदिर में गूंजते भजनों ने उसी संवेदना को जागृत कर दिया।

भक्तिमय वातावरण में उनकी आंखों से बहते आंसू इस बात का संकेत थे कि संगीत और आस्था जब एक साथ मिलते हैं, तो भावनाओं का सैलाब खुद-ब-खुद उमड़ पड़ता है। यही वजह है कि जयपुर के इस ऐतिहासिक मंदिर में बिताया गया यह पल उनके लिए भी एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया।

 

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