October 19, 2026

शिमला के राम मंदिर में ‘निकाह’ पर रार; हिंदू संगठन भड़के, सूद सभा की मीटिंग आज

संजौली मस्जिद का मामला पिछले कुछ अरसे से शिमला ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश और देश भर में चर्चा का विषय बना रहा था। ऐसे माहौल में राम मंदिर से जुड़ा यह नया विवाद सामने आने से शहर में धार्मिक और सामाजिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

मामला राम बाजार स्थित राम मंदिर के हॉल में 11 अप्रैल को प्रस्तावित एक निकाह समारोह से जुड़ा है। मंदिर के हॉल की बुकिंग मुस्लिम परिवार द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद हिंदू संघर्ष समिति ने इसका विरोध शुरू कर दिया। समिति का कहना है कि मंदिर की संपत्ति पर इस प्रकार का आयोजन धार्मिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। इस संबंध में मंदिर का संचालन व प्रबंधन करने वाली सूद सभा को ज्ञापन सौंपकर निकाह के आयोजन को रद्द करने की मांग की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि निकाह आयोजित हुआ तो सड़कों पर उतरकर विरोध किया जाएगा। समिति के पदाधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि विरोध के प्रतीकात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं। इस चेतावनी के बाद मामला स्थानीय स्तर पर तेजी से चर्चा में आ गया है।

राम मंदिर परिसर का संचालन करने वाली सूद सभा के अध्यक्ष राजीव सूद ने कहा है कि इस मामले को लेकर मंगलवार को आपात बैठक बुलाई गई है, जिसमें सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सूद सभा सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करती है और कोई भी निर्णय सोच-समझकर लिया जाएगा। उनके अनुसार यह पहली बार नहीं है जब मंदिर के हॉल में किसी मुस्लिम परिवार का विवाह समारोह प्रस्तावित हुआ हो। राजीव सूद ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में 15 से अधिक मुस्लिम परिवारों के निकाह इसी हॉल में आयोजित किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर हॉल में पहले से ही मांस, मछली और मदिरा के उपयोग पर प्रतिबंध लागू है और परिसर की धार्मिक मर्यादाओं का पूरा ध्यान रखा जाता है।

राम मंदिर परिसर में इससे पहले भी विवाद उठा था। अक्टूबर 2024 में यहां आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मंदिर पहुंचे थे, लेकिन परिसर में साईं बाबा की मूर्ति देख उन्होंने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया था। वे बिना दर्शन किए ही मंदिर से लौट गए थे और बाद में सीधे जाखू मंदिर पहुंचे, जहां से उन्होंने वीडियो संदेश जारी किया था। उस समय उनके प्रतिनिधियों ने कहा था कि मंदिरों में अन्य धर्म से जुड़े व्यक्तित्व की मूर्तियां स्थापित करने को लेकर आपत्ति है। इस घटना ने भी राष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा बटोरी थी।

राम बाजार में स्थित राम मंदिर शिमला शहर के प्रमुख धार्मिक और सामाजिक केंद्रों में गिना जाता है। ये मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है और साल भर यहां धार्मिक समारोहों का आयोजन चलता रहता है। मंदिर की बहुमंजिला इमारत शहर के बीचोंबीच स्थित है और इसके पास से होकर रास्ता ऐतिहासिक माल रोड तक जाता है। इसी मंदिर के नाम पर शिमला के प्रसिद्ध “राम बाजार” का नाम पड़ा। मंदिर की सबसे ऊपरी मंजिल पर भगवान राम, लक्ष्मण और सीता के साथ हनुमानजी सहित अन्य देवी-देवताओं की भव्य मूर्तियां स्थापित हैं। नीचे की मंजिलों में बने बड़े हॉल में वर्षों से शादियों और अन्य सामाजिक समारोहों का आयोजन होता रहा है। इस पूरे परिसर का संचालन सूद सभा करती है और यह स्थान लंबे समय से शहर के सामाजिक जीवन का एक अहम हिस्सा बना हुआ है।

 

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