तो क्या 25 रुपये और बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? क्या बता रहे हैं एक्सपर्ट्स?

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पेट्रोल और डीजल के दाम में पिछले हफ्ते प्रति लीटर 3-3 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद भी अंडर-रिकवरीज की वजह से फ्यूल रिटेलर्स को भारी-भरकम नुकसान हो रहा है। एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर पेट्रोल-डीजल के दाम में प्रति लीटर 25 रुपये की बढ़ोतरी और की जाती है तो कंपनियां मार्केटिंग मार्जिन पर ब्रेक-इवेन में आएंगी। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) को हर दिन 1380 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। यह बात इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में कही गई है।

नोमुरा के एनालिस्ट बिनीत बंका का कैलकुलेशन दिखाता है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) को ब्लेंडेड बेसिस पर मौजूदा समय में पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर 25 रुपये का नुकसान हो रहा है और उनका रोजाना का नुकसान 1380 करोड़ रुपये पहुंच गया है। ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि अगर नुकसान को रोका नहीं गया तो इंटीग्रेटेड लॉस का मौजूदा रन रेट इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) की बैलेंस शीट इक्विटी को क्रमश: 10 साल, 4 और 2 साल में खत्म कर देगा।

हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) पर सबसे ज्यादा असर है। नोमुरा ने लिखा है, ‘हायर मार्केटिंग एक्सपोजर की वजह से एचपीसीएल के इंटीग्रेटेड मार्जिन्स पर सबसे ज्यादा असर है।’ नोमुरा का अनुमान है कि एचपीसीएल को मौजूदा समय में इंटीग्रेटेड बेसिस पर 19 डॉलर प्रति बैरल का नुकसान हो रहा है। वहीं, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) को प्रति बैरल 4 डॉलर और बीपीसीएल को प्रति बैरल 8 डॉलर का नुकसान हो रहा है। मिडिल ईस्ट में शुरू हुई लड़ाई से पहले यह तीनों कंपनियां मार्जिन में 12-14 डॉलर प्रति बैरल बना रही थीं।

एलारा कैपिटल के गगन दीक्षित ने भी यही बात उठाई है। उन्होंने बताया है, ‘रिफाइनिंग क्षमता के मुकाबले हायर रिटेल मार्केटिंग एक्सपोजर की वजह से हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड पर सबसे ज्यादा असर है। महंगे कच्चे तेल, लो प्रॉडक्ट प्राइसेज और काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव की वजह से चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही चुनौती भरी होगी।’ एलारा कैपिटल का अनुमान है कि प्रति लीटर 3 रुपये की बढ़ोतरी एनुअलाइज्ड बेसिस पर पेट्रोल और डीजल के इंटीग्रेटेड लॉस को करीब 34,500 करोड़ रुपये कम करेगी। कंपनियों को LPG अंडर रिकवरीज की मार भी झेलनी पड़ रही है। एलपीजी अंडर-रिकवरीज रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई है। हालिया एनालिस्ट कॉल में एचपीसीएल मैनेजमेंट ने प्रति सिलेंडर 670 रुपये के नुकसान का हवाला दिया था।

 

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