बात अगस्त 2017 की है। गुजरात में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने थे। भाजपा ने अमित शाह और स्मृति ईरानी को अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि कांग्रेस ने सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल को पांचवी बार राज्यसभा में भेजने के लिए उम्मीदवार बनाया था। उधर, भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने ठान लिया था कि अहमद पटेल को इस बार संसद नहीं पहुंचने देना है। इसके लिए जो सियासी चक्रव्यूह रचा गया था, उसमें कांग्रेस के ही बागी विधायक बलवंत सिंह राजपूत को अहमद पटेल के खिलाफ खड़ा कर दिया था।
उस वक्त गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के 51 विधायक थे। इनमें से छह विधायकों ने शंकर सिंह बाघेला के साथ बगावत कर दी थी। इनमें से तीन ने भाजपा का दामन थाम लिया था। उन्हें में से एक विधायक बलवंत सिंह राजपूत थे, जिन्हें भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में उतार दिया था। बाकी 44 विधायकों को तब कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री डीके शिवकुमार गांधीनगर से ले उड़े थे और उन्हें बेंगलुरु में अपने रिजॉर्ट में ठहराया था। डीके ने उन विधायकों की खूब मेहमाननवाजी की थी।
जब राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग होने लगी, तब उन विधायकों को गांधीनगर लाया गया था। इन 44 में से 43 विधायकों ने अहमद पटेल को वोट दिया था जबकि एक ने क्रॉस वोटिंग की थी लेकिन जब मतों की गिनती शुरू हुई तो हाई वोल्टेज ड्रामा होने लगा और आधी रात तक गिनती रोकनी पड़ी। आखिरकार मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा। आयोग ने देर रात दो कांग्रेसी विधायकों को वोट रद्द कर दिए। वोटिंग के दौरान कांग्रेस ने अपने दो बागी विधायकों (राघवजी पटेल और भोलाभाई गोहेल) पर अपने मत पत्र भाजपा के पोलिंग एजेंट को दिखाने का आरोप लगाया।
इस पर देर रात तक चले मैराथन विचार-विमर्श के बाद, चुनाव आयोग ने नियमों के उल्लंघन के आधार पर उन दोनों वोटों को रद्द कर दिया। इस तरह रात दो बजे घोषित चुनाव परिणाम में अहमद पटेल को कुल 44 वोट मिले और उनकी जीत हुई जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी बलवंत सिंह राजपूत को 43 वोट मिले। जीत के लिए अब 45 की जगह कुल 44 वोटों की ही दरकार थी। माना जाता है कि जेडीयू के विधायक ने अहमद पटेल के पक्ष में मतदान किया था, जिससे उनकी संख्या 44 हो गई।
इस तरह अहमद पटेल की रणनीति और डीके शिवकुमार की रिजॉर्ट पॉलिटिक्स ने अमित शाह की रणनीति पर पानी फेर दिया था। इस जीत के बाद अमहद पटेल ने तब ट्वीट कियाथा, ‘सत्यमेव जयते’। उन्होंने कहा था, ”यह केवल मेरी जीत नहीं है बल्कि शर्मनाक तरीक़े से पैसे, बाहुबल और सरकारी मशनरियों के दुरुपयोग की हार भी है।”

