यूपी की छात्राओं को मुफ्त स्कूटी के लिए नियम तय, इन बेटियों को योगी सरकार देने जा रही सौगात

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपना एक और वादा पूरा करने जा रही है। छात्राओं को मुफ्त स्कूटी बांटने की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। इसके लिए नियम भी तय कर लिए गए हैं। कॉलेजों को इस बारे में प्रोफार्म भेजकर नियम पूरा करने वाली यानी पात्र छात्राओं का ब्योरा मांगा गया है। ब्योरा आते ही स्कूटी के लिए चयनित छात्राओं की सूची जारी कर दी जाएगी। योगी सरकार ने पिछले चुनाव से पहले छात्राओं को स्कूटी देने का वादा किया था। इसी वादे को पूरा करने के लिए बजट में स्कूटी के लिए 400 करोड़ रुपए का आवंटन भी किया गया था। ऐसे में पहले चरण में 45 हजार छात्राओं को स्कूटी मिल सकती है।

छात्राओं को मुफ्त स्कूटी योजना का नाम रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना रखा गया है। राज्य विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं को स्कूटी बांटी जाएगी। सीएम योगी के निर्देश पर उच्च शिक्षा विभाग की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसके तहत जिन छात्राओं के परिवार की वार्षिक आय 12 लाख से कम होगी उन्हें मुफ्त स्कूटी दी जाएगी।

उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने मंगलवार को बताया कि उच्च शिक्षा विभाग की ओर से राज्य विश्वविद्यालयों व कॉलेजों से 80, 85 व 90 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाली स्नातक प्रथम वर्ष की छात्राओं का डाटा मांगा गया है। इसी के आधार पर पहले चरण की छात्राओं का चयन होगा। उन्होंने यह भी बताया कि छात्राओं को पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी दी जाएगी।

यूपी के विश्वविद्यालयों में करीब नौ लाख छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं। अब तय किए गए नियमों के अनुसार स्नातक और स्नातकोत्तर की छात्राओं को स्कूटी की सौगात दी जाएगी। सरकार का मानना है कि स्कूटी से छात्राओं को प्रोत्साहन देने के साथ ही आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाना भी है। बहुत सी मेधावी छात्राएं कोई साधन नहीं होने के कारण भी कॉलेज नहीं जा पाती हैं। ऐसे में स्कूटी उन्हें कॉलेज तक लाने में भी मदद कर सकेगी। प्रस्ताव पर शासन की हरी झंडी मिलते ही पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता भी बनी रहे।

राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में यूनिफार्म लागू करने के मामले पर उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमने इसका डाटा मंगवाया है। इसका अध्ययन किया जा रहा है। लगभग 75 फीसदी महाविद्यालयों में यूनिफार्म का प्रयोग हो रहा है। अभी इसके लिए कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ है। शेष कॉलेजों के लिए भी आदेश जारी करेंगे। यह अनुशासन के लिए बहुत जरूरी है।

 

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