राम मंदिर ट्रस्ट से इस्तीफा देते ही चंपत राय पर कसा शिकंजा, पुलिस ने की पूछताछ, बयान दर्ज

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अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब पुलिस का शिकंजा ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर भी कस रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफा देते ही उनसे भी पुलिस ने पूछताछ की और बयान दर्ज किया है। हालांकि पुलिस की एफआईआर में चंपत राय या किसी पदाधिकारी का नाम नहीं है। इसके बाद भी जांच को आगे बढ़ाने और चोरी में पकड़े गए आरोपियों की गतिविधियों को लेकर जानकारी ली गई है। एसआईटी ने भी सबसे पहले चंपत राय से ही पूरे मामले पर जानकारी ली थी और बयान दर्ज किया था। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद ही पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच के अगले चरण में ट्रस्ट से जुड़े अन्य प्रमुख पदाधिकारियों के भी बयान दर्ज किए जाएंगे। इनमें डॉक्टर अनिल मिश्रा, गोपाल राव के भी नाम शामिल हैं। बताया जा रहा है कि मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए क्रमवार संबंधित लोगों से पूछताछ हो रही है। इसी कड़ी में ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि जांच को आगे बढ़ाया जा सके। चंपत राय और अनिल मिश्रा ने शनिवार को ही अपने पदों से इस्तीफा दिया था।

ट्रस्ट की ही तहरीर पर आठ लोगों को नामजद करते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज करते हुए शुक्रवार को सभी को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के घरों पर रविवार को ताबड़तोड़ छापेमारी भी की गई थी। इस छापेमारी में ज्वैलरी, कैश और जमीनों के दस्तावेज बरामद होने की बात कही जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों को भी आज कोर्ट में पेश करने की तैयारी पुलिस कर रही है। माना जा रहा है कि आरोपियों की रिमांड भी मांगी जा सकती है।

ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे के तरीके को लेकर भी अयोध्या के संत समाज में कई तरह के सवाल उठाए गए। संतों का कहना है कि चंपत राय के इस्तीफे का तरीका सामान्य प्रक्रिया से अलग दिखाई देता है। उनका तर्क था कि चंपत राय स्वयं सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। उनका अपना एक्स और फेसबुक अकाउंट है। ऐसे में यदि वे इस्तीफा देते, तो कम से कम एक संक्षिप्त संदेश के माध्यम से रामभक्तों और आम लोगों को जानकारी दे सकते थे। हालाकि यह भी कहा जा रहा है कि हाईकमान के निर्देश मिलते ही जल्दी ही चंपत राय सफाई के साथ सभी के सामने आएंगे।

संत समाज के बीच यह चर्चा भी रही कि यदि इस्तीफा देना था तो उसे व्यक्तिगत रूप से ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंपा जाना चाहिए था। महंत नृत्य गोपाल की ओर से ही इसकी पुष्टि की जानी चाहिए। वहीं, संत समाज में यह सवाल भी उठाया गया कि किसी ट्रस्ट का महासचिव इस्तीफा देता है तो वह कोषाध्यक्ष को क्यों देगा। सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष को ही संबोधित किया जाना चाहिए। इन तमाम सवालों के बीच अयोध्या में ट्रस्ट के भीतर चल रहे घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। अब वस्तुस्थिति 11 जुलाई की बैठक में ही सामने आएगा।

ट्रस्ट के कामकाज में व्यापक बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। 11 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में संगठनात्मक ढांचे में बड़े परिवर्तन पर फैसला हो सकता है। बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफों पर भी अंतिम निर्णय की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और पेशेवर बनाने के लिए सचिव और सीईओ जैसे नए पद सृजित किए जा सकते हैं। बैंकिंग, वित्त, प्रबंधन और आईटी क्षेत्र के अनुभवी पेशेवर लोगों को जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी है। ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन में भी बदलाव प्रस्तावित है। आउटसोर्सिंग व्यवस्था की समीक्षा कर कई व्यवस्थाओं को सीधे ट्रस्ट के नियंत्रण में लाया जा सकता है। कर्मचारियों की नियुक्ति, डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और लेखा-जोखा को आधुनिक प्रणाली से जोड़ने पर भी चर्चा होगी।

बैठक में नए महासचिव की नियुक्ति भी प्रमुख एजेंडा रहेगी। संघ की सहमति से नए चेहरे को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। चर्चा है कि सचिव और सीईओ की नियुक्ति के बाद महासचिव की भूमिका पहले की तुलना में सीमित या सलाहकार स्वरूप की हो सकती है। 11 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक को राम मंदिर ट्रस्ट के भविष्य की दिशा तय करने वाली अहम बैठक माना जा रहा है, जिसमें प्रशासनिक, वित्तीय और प्रबंधन व्यवस्था में व्यापक बदलावों पर मुहर लग सकती है।

 

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