ग्रीन बेल्ट में भी हो सकेगा निर्माण, विकास प्राधिकरण के बिल्डिंग बायलॉज में बड़ा बदलाव
यूपी की योगी सरकार ने आम लोगों को जरूरी सुविधाएं देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सीएम के निर्देश पर शासन ने विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधि तथा आदर्श जोनिंग रेगुलेशंस-2025 में महत्वपूर्ण संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रस्तावित बदलावों के तहत ग्रीन बेल्ट क्षेत्रों में कई सार्वजनिक और जनोपयोगी सुविधाओं के विकास का रास्ता खुल सकता है। इसके साथ ही 50 बेड से अधिक क्षमता वाले अस्पतालों को लघु उद्योग भू-उपयोग श्रेणी में रखने का प्रस्ताव है। शासन ने इन संशोधनों पर प्राप्त आपत्तियों और सुझावों के निस्तारण के लिए प्रदेश स्तरीय समिति का गठन कर दिया है।
आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की ओर से जारी प्रस्ताव के अनुसार ट्रांसफार्मर, ओवरहेड जलाशय, बिजली स्टेशन एवं सबस्टेशन, जलकार्य, माइक्रोवेव एवं वायरलेस केंद्र, सीवेज उपचार संयंत्र, कचरा संग्रह केंद्र, सार्वजनिक एवं सामुदायिक शौचालय तथा अन्य जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े भवनों और प्रतिष्ठानों को ग्रीन बेल्ट भू-उपयोग में अनुमन्य किए जाने का प्रस्ताव है। इससे शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
शासन ने जारी सूचना के बाद प्राप्त आपत्तियों और सुझावों की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। समिति के अध्यक्ष लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रमतेश कुमार बनाए गए हैं। समिति में मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक, लखनऊ, कानपुर एवं गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के मुख्य नगर नियोजक, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के मुख्य वास्तुविद नियोजक तथा आवास बंधु के निदेशक को सदस्य बनाया गया है।
समिति प्राप्त आपत्तियों और सुझावों का परीक्षण कर एक सप्ताह के भीतर अपनी संस्तुति शासन को सौंपेगी। इसके बाद अंतिम निर्णय लेकर संशोधित बिल्डिंग बायलॉज और जोनिंग रेगुलेशंस लागू किए जाएंगे।
प्रस्तावित संशोधनों को प्रदेश में शहरी विकास और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ग्रीन बेल्ट में जनोपयोगी सुविधाओं की अनुमति से विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की संभावना है।
