September 26, 2026

राम मंदिर चंदवा चोरी: चंपत राय की सुपुर्दगी में 21 दिन तक रहा चोरी का माल, पुलिस चार्जशीट में खुलासा

राम मंदिर चढ़ावा चोरी की वारदात का खुलासा कैसे हुआ और पकड़े जाने के बाद चोरी के माल का क्या हुआ, इसकी पूरी कहानी पुलिस की चार्जशीट में सामने आई है। चार जून को एक गणना कर्मी ने दिल्ली से अयोध्या ट्रेन से आ रहे राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय को मोबाइल पर चढ़ावा चोरी की वीडियो भेजकर जानकारी दी थी। इसके बाद गणना कक्ष में चेकिंग कराई गई तो बाथरूम से दो लाख 25 हजार रुपये बरामद हुए। बाद में पकड़े गए आरोपियों ने चोरी के माल में बचे रुपये, अन्य मुद्रा और आभूषण चंपत राय, गोपाल और ट्रस्ट के अन्य कर्मियों की मौजूदगी में सौंप दिए थे। इसके बाद सहमति पत्र और सुपुर्दगीनामा तैयार कर माल ट्रस्ट लॉकर में रखवाया गया था।

पुलिस की चार्जशीट के अनुसार चंपतराय ने विवेचक को दिए बयान में बताया कि वह चार जून को दिल्ली से अयोध्या ट्रेन से आ रहे थे। रात करीब पौने दस बजे उनके मोबाइल नंबर पर आनंद चौधरी ने एक वीडियो और लिखित मैसेज भेजा। वीडियो में बाथरूम के अंदर नोटों की गड्डियां दिखाई दे रही थीं। मैसेज में लिखा था कि आज यह सारा पैसा बाथरूम से मिला है। इसमें दो लाख 25 हजार रुपये थे। कुछ लड़के कई दिनों से चोरी कर रहे थे। पांच जून को अनिल मिश्रा, गोपालराव और नरेन्द्र आवास पर आए और लैपटाप पर कुछ वीडियो दिखाए। इसकी तस्दीक अनिल मिश्रा, गोपालराव और नरेंद्र ने भी की है।

राम जन्मभूमि चढ़ावा चोरी का माल 21 दिनों तक चंपत राय की सुपुर्दगी में रहा। मामले में एफआईआर दर्ज होने और पुलिस की विवेचना शुरू होने के बाद आरोपियों से पूछताछ की गई। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने ट्रस्ट के लॉकर कक्ष से चोरी का माल अपने कब्जे में लिया। चोरी के माल की बरामदगी के लिए लिखापढ़ी समेत कई नियमों का पालन करना होता है। यदि चोरी का माल कहीं रखा गया है अथवा किसी को मिला है तो थाने को सूचना देनी चाहिए थी।

गवाह आनंद चौधरी ने विवेचक को बताया कि जब उसके घर जाने का समय हुआ तो गणना कक्ष में मौजूद कर्मियों ने उसे रोक लिया था। उस समय बैंक की तरफ से सत्या और ट्रस्ट की तरफ से विनय श्रीवास्तव समेत अन्य गणना कर्मी मौजूद थे। गणना कक्ष से दो लाख 25 हजार बरामद हुए थे। उसी दौरान काउंटिंग में लगे करुणेश पाण्डेय, अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा पर शक हुआ। उसने देखा कि वे दान में मिले रुपयों की गड्डी उठाकर मेज के नीचे अपने कमर में छिपा रहे थे।

जानकारी उसने काउंटिंग में लगे अन्य गणना कर्मियों को दी। चार जून को जब अविनाश शुक्ला ने नोटों की गड्डी चोरी की तो संत वर्मा ने उसे देख लिया। इसकी सूचना ट्रस्ट की तरफ से गणना कक्ष में मौजूद विनय श्रीवास्तव और एसबीआई के कर्मी सत्य प्रकाश को दी गई। इसके बाद गणना कक्ष के बाहर चेकिंग लगा दी गई। अविनाश शुक्ला व अन्य लोगों को जब बाहर गेट पर चेकिंग की जानकारी हुई तो गबन की गई धनराशि को बाथरूम में ले जाकर छिपा दिया गया। तलाशी के दौरान दो लाख 25 हजार बरामद हुए।

मुकदमा ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज होने के बाद विवेचना में पुलिस ने रामजन्मभूमि ट्रस्ट अयोध्या परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान चोरी के छह आरोपियों ने अपने बयान में स्वीकार किया कि ट्रस्ट के गणना कक्ष में चढ़ावे के रुपयों की चोरी की थी। चोरी पकड़े जाने के बाद हटाए गए रुपये, आभूषण में बचे हुए रुपये, अन्य मुद्रा और आभूषण महासचिव चंपत राय, गोपाल और ट्रस्ट के अन्य कर्मियों की मौजूदगी में सुपुर्द किए गए थे।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.