मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के लिए बड़े ऐलान के संकेत दिए थे।
उन्होंने कहा, “मैं यहां उपस्थित सभी महिलाओं को विश्वास दिलाता हूं कि हमारी डबल-इंजन सरकार उनके आर्थिक स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता के लिए एक बेहद आकर्षक पैकेज लेकर आ रही है।”
हालांकि मुख्यमंत्री ने उस समय राशि का खुलासा नहीं किया था, लेकिन शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, सरकार पात्र महिलाओं को अधिकतम 50,000 रुपए तक की मदद देने के प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन कर रही है। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि योजना की वित्तीय व्यावहारिकता की जांच की जा रही है।
भाजपा संगठन और शासन स्तर पर इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए दो मुख्य विकल्पों पर चर्चा चल रही है।
पात्र महिलाओं के बैंक खातों में एकमुश्त या किश्तों में सीधे कैश ट्रांसफर किया जाए। या फिर इस राशि को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, निराश्रित महिला पेंशन योजना या मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना जैसी चल रही योजनाओं के दायरे और बजट को बढ़ाकर लाभार्थियों तक पहुंचाया जाए।
उत्तर प्रदेश के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो महिलाएं किसी भी राजनीतिक दल की हार-जीत तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाती हैं। नई वोटर लिस्ट के अनुसार, यूपी में 6 करोड़ से ज्यादा महिला मतदाता हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत 62.24% रहा था, जो पुरुषों (59.56%) के मुकाबले काफी अधिक था।
CSDS और एक्सिस माई इंडिया के चुनाव बाद विश्लेषण क् आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में पुरुषों की तुलना में ज्यादा महिलाओं ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया था।
मध्यप्रदेश में ‘लाडली बहना योजना’ और महाराष्ट्र में ‘लड़की बहिन योजना’ की अपार चुनावी सफलता के बाद, भाजपा यूपी में भी इस आजमाए हुए फॉर्मूले से विपक्षी खेमे के ‘स्त्री सम्मान’ के दांव को पछाड़ने की तैयारी में है।