गणेश उत्सव में 50,000 करोड़ का रिकॉर्ड कारोबार, वोकल फॉर लोकल और स्वदेशी सामान बने पहली पसंद
आज गणेश चतुर्थी से शुरू हो रहे 10 दिवसीय गणेशोत्सव की धूम देशभर में दिखाई दे रही है। आज से प्रारंभ हुआ यह त्योहार 25 सितंबर को संपन्न होगा।
इस वर्ष गणेशोत्सव के दौरान 50 हजार करोड़ से अधिक के व्यापार होने का अनुमान है। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा लगभग 30 हजार करोड़ था, जबकि 2025 में यह बढ़कर 30 से 40 हजार करोड़ के बीच पहुंचा।
कारोबारी संगठन कैट के अनुसार, इस वर्ष उपभोक्ता खर्च में वृद्धि, सामुदायिक आयोजनों के विस्तार, बड़े पंडालों, पर्यटन, आयोजन प्रबंधन और स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण यह आंकड़ा 50 हजार करोड़ से अधिक रहने की संभावना है।
आज गणेश चतुर्थी से शुरू हो रहे 10 दिवसीय गणेशोत्सव की धूम देश भर में दिखाई दे रही है। आज से प्रारंभ हुआ यह त्योहार आगामी 25 सितंबर को गणेश विसर्जन से संपन्न होगा।
देश भर में करोड़ों लोग अपने घरों में श्री गणेश जी की स्थापना करते है और अपनी सामर्थ्य अनुसार एक, दिन,तीन दिन, पांच दिन अथवा 10 दिन तक श्री गणेश का प्रतिदिन विशेष पूजन करते हैं और तत्पश्चात श्री गणेश का विसर्जन करते हैं।
वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी मिलता है। खास बात है कि इससे मेक इन इंडिया और लोकल फार ग्लोबल के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को भी मजबूती मिल रही है।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वोकल फार लोकल और आत्मनिर्भर भारत के आह्वान का प्रभाव इस वर्ष गणेशोत्सव के बाजारों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
देशभर में गणेश चतुर्थी के अवसर पर उपयोग होने वाली अधिकांश प्रतिमाएं, सजावटी सामग्री, पूजा सामग्री, प्रकाश व्यवस्था, हस्तशिल्प उत्पाद, वस्त्र और उपहार पूर्णतः स्वदेशी हैं तथा व्यापारियों और उपभोक्ताओं ने बड़ी संख्या में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दी है।
विभिन्न राज्यों के प्रमुख व्यापारिक संगठनों, बाजारों और अन्य लोगों से बातचीत के आधार पर कैट ने दावा किया कि इस वर्ष गणेशोत्सव के दौरान 50 हजार करोड़ से अधिक के व्यापार होने का अनुमान है।
वर्ष 2024 में यह आंकड़ा लगभग 30 हजार करोड़ था, जबकि 2025 में यह बढ़कर 30 से से 40 हजार करोड़ के बीच पहुंचा।
इस वर्ष उपभोक्ता खर्च में वृद्धि, सामुदायिक आयोजनों के विस्तार, बड़े पंडालों, पर्यटन, आयोजन प्रबंधन और स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण यह आंकड़ा 50 हमारा करोड़ से अधिक रहने की संभावना है।
व्यापारी संगठनों के अनुसार गणेश चतुर्थी अब केवल धार्मिक आस्था और भक्ति का पर्व नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत की ‘सनातन अर्थव्यवस्था’की शक्ति, व्यापकता और जीवंतता का एक बड़ा उदाहरण बन चुका है।
यह पर्व करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार और आय उपलब्ध कराता है तथा देश की स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करता है। कैट के 50 हजार करोड़ के व्यापारिक अनुमान में विभिन्न क्षेत्रों का महत्वपूर्ण योगदान है।
गणेश प्रतिमाओं का कारोबार, पंडाल निर्माण, सजावट और प्रकाश व्यवस्था, फूलों, पूजा सामग्री व प्रसाद, मिठाइयों, ड्राई फ्रूट, फल, खाद्य पदार्थों व कैटरिंग सेवाएं, वस्त्र, उपहार व उपभोक्ता वस्तुओं, पर्यटन, परिवहन व आतिथ्य क्षेत्र,इवेंट मैनेजमेंट, विज्ञापन एवं प्रायोजन गतिविधियों तथा अन्य स्थानीय वस्तुओं व सेवाओं को बड़ा व्यापार मिलता है।
कैट के महामंत्री व चांदनी चौक के सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात, गोवा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु तथा देश के प्रमुख महानगरों में गणेशोत्सव विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है।
इन राज्यों में लाखों मूर्तिकार, फूल विक्रेता, मिठाई निर्माता, सजावट विशेषज्ञ, बांस व कपड़ा उद्योग, ध्वनि– प्रकाश तकनीशियन, टेंट हाउस संचालक, परिवहन सेवाएं, छोटे व्यापारी और असंगठित क्षेत्र के लाखों श्रमिक इस पर्व से अपनी आजीविका अर्जित करते हैं।
विशेष कि इस वर्ष गणेशोत्सव में पर्यावरण-अनुकूल व सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पंडालों की विशेष मांग देखी जा रही है। केले के पत्तों, गेंदे के फूलों, प्राकृतिक कपड़ों, मिट्टी के दीपकों, बांस तथा हस्तनिर्मित सामग्री से सजे इको-फ्रेंडली मंडप सबसे लोकप्रिय हैं।
इसके अतिरिक्त अयोध्या राम मंदिर थीम, पंचतत्व थीम, भारतीय सांस्कृतिक विरासत थीम, महाराष्ट्र की पारंपरिक शैली, मंदिर वास्तुकला आधारित थीम, मोर व कमल सज्जा, ग्रामीण भारत थीम तथा वोकल फार लोकल थीम वाले पंडाल लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
यह संपूर्ण उत्सवी श्रृंखला भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़े विकास इंजन का कार्य करेगी। प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि गणेश चतुर्थी केवल श्रद्धा और भक्ति का पर्व नहीं है, बल्कि भारत की ‘सनातन अर्थव्यवस्था’ का एक सशक्त प्रतीक है।
इस वर्ष यह पर्व देशभर में 50 हजार करोड़ से अधिक की आर्थिक गतिविधियों को जन्म देगा, जिससे करोड़ों व्यापारी, कारीगर, एमएसएमई, सेवा प्रदाता, महिला उद्यमी, स्वरोजगार से जुड़े लोग और श्रमिक वर्ग लाभान्वित होंगे। यह उत्सव भारत की सांस्कृतिक शक्ति के साथ-साथ उसकी आर्थिक क्षमता का भी भव्य प्रदर्शन है।
