October 19, 2026

चांदी पहली बार ₹3 लाख के पार, सोने ने लगाई ₹3,000 की छलांग

MCX पर चांदी का मार्च वायदा ₹13,550 या करीब 5% से अधिक बढ़कर ₹3,01,315 प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर टैरिफ की धमकी से जियोपॉलिटिकल जोखिम बढ़ गया, जिससे निवेशक सेफ-हेवन एसेट्स की ओर आकर्षित हुए। इसका असर सोने के भाव पर भी पड़ रहा है। MCX सोने का फरवरी वायदा करीब ₹3,000 या 2% से ज़्यादा बढ़कर ₹1,45,500 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया।

ट्रेड वॉर की आशंका के चलते सोने और चांदी की कीमतें अंतराष्ट्रीय मार्केट में भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक सिंगापुर में सुबह 8:11 बजे तक स्पॉट गोल्ड 1.6 प्रतिशत बढ़कर 4,668.76 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जो इससे पहले 4,690.59 डॉलर के शिखर पर था। चांदी 3.2 प्रतिशत बढ़कर 93.0211 डॉलर पर पहुंच गई और 94.1213 डॉलर के उच्च स्तर को छू गई।

एनरिच मनीके सीईओ पॉनमुदी आर के अनुसार, COMEX चांदी का भाव 93.7 डॉलर के शीर्ष स्तर को छूने के बाद 89-90 डॉलर के क्षेत्र में तेजी से सुधरा है, जो लंबे समय तक चली तेजी के बाद शॉर्ट टर्म में फायदा उठाने की गतिविधि को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह गिरावट रुझान में बदलाव का संकेत नहीं देती। चांदी लगातार मजबूत साप्ताहिक लाभ दर्ज कर रही है, जिसे निरंतर औद्योगिक मांग और लगातार बने रहने वाली आपूर्ति की कमी का समर्थन प्राप्त है। अब तक यह सुधार व्यवस्थित रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि गिरावट पर खरीदार सामने आते रहते हैं।

पॉनमुदी के अनुसार, एमसीएक्स पर चांदी का भाव कंसॉलिडेशन के बाद भी अपने तेजी वाले चैनल ढांचे का सम्मान कर रहा है। उन्होंने बताया कि 2,83,000–2,80,000 रुपये का क्षेत्र मजबूत सपोर्ट का काम करता है, जबकि 2,95,000 रुपये के ऊपर स्थिर चाल कीमतों को 3,05,000 से 3,20,000 रुपये की ओर तेजी से बढ़ा सकती है।

सेबी-पंजीकृत कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने तकनीकी दृष्टिकोण बताते हुए कहा कि चांदी का भाव आज 93 डॉलर प्रति औंस के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट दिखाया है। गुप्ता ने आगे स्पष्ट किया कि यदि यह सफेद धातु इस स्तर से ऊपर कुछ और घंटों तक बनी रहती है, तो हम निकट अवधि में इस बहुमूल्य धातु को 95 डॉलर और थोड़े अधिक समय में 100 डॉलर को छूते हुए देख सकते हैं।

पिछले साल चांदी ने सोने को पीछे छोड़ दिया था, अक्टूबर में शॉर्ट स्क्वीज और लंदन में लगातार सप्लाई की कमी के कारण इसमें लगभग 150% की बढ़ोतरी हुई थी। ट्रेडर अमेरिकी सेक्शन 232 जांच के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं, जिससे चांदी पर टैरिफ लग सकता है।

चांदी की कीमतें बढ़ने के पीछे जियो-पॉलिटिकल टेंशन के अलावा औद्योगिक डिमांड और कम सप्लाई भी है। चांदी सिर्फ सिक्कों, गहनों या बर्तनों में इस्तेमाल नहीं होती। उसके अनेक औद्योगिक इस्तेमाल हैं। सोने के बाद चांदी ही सबसे अच्छी सुचालक है। ताप ऊर्जा और विद्युत, दोनों के लिए। कीमत के कारण ये दोनों धातुएं आम इस्तेमाल में नहीं हैं।

फिर भी चांदी बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और ऑटो उद्योग में इस्तेमाल होती है। इसमें एक और खासियत है कि यह एंटी बैक्टीरियल और गैर-विषाक्त धातु है। इस वजह से इसके औषधीय गुण भी हैं और चांदी के वर्क जैसा भोजन में सीधा इस्तेमाल भी होता है।

इसके इस्तेमाल की सूची लंबी है। इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में यह स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप, कंप्यूटर और टीवी में सर्किट बोर्ड, कनेक्टर व सेमीकंडक्टर बनाने में इस्तेमाल होती है। सोलर पैनल के फोटोवोल्टिक सेल में चांदी की अहम भूमिका है। दवाओं के अलावा चिकित्सा उपकरणों और बैटरियों में यह इस्तेमाल होती है।

ऑटो उद्योग में यह इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों और सेंसर बनाने में लगती है। इसके अलावा पेट्रोकेमिकल उद्योग में रासायनिक समीकरणों को तेज करने के लिए उत्प्रेरक के तौर पर भी चांदी का इस्तेमाल होता है।

जाहिर है, चांदी के उत्पादन या खपत का आधे से ज्यादा हिस्सा औद्योगिक उत्पादन में जाता है, और सोने की तरह यह बची भी नहीं रहती, बल्कि बहुत बड़ी मात्रा में इसकी खपत हो जाती है। इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई और सौर ऊर्जा जैसे उद्योगों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए विशेषज्ञों का अनुमान है कि चांदी की औद्योगिक मांग अभी और बढ़ने वाली है।

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