October 19, 2026

लखनऊ पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, आज से शुरू करेंगे गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार को लखनऊ पहुंचे, जहां से वह 11 मार्च से शुरू होने वाले तीन दिवसीय गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान की शुरुआत करेंगे। शहर पहुंचते ही उन्होंने हनुमान मंदिर पहुंचकर दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हो गए, जहां शीतला अष्टमी के अवसर पर आयोजित मुख्य सभा में गो-प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध अभियान का औपचारिक शंखनाद किया जाएगा।

भक्तों की भीड़ को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। आशियाना, पीजीआई और कृष्णानगर थाने की पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है, जबकि आयोजन स्थल पर भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक तीन दिन के कार्यक्रम के लिए आयोजकों की ओर से करीब 4.5 लाख रुपये का शुल्क स्मारक समिति में जमा कराया गया है।

इससे पहले गोरक्षा और सनातन प्रतीकों के कथित अपमान को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला था। लखनऊ जाते समय बाबा बोधेश्वर महादेव मंदिर में रुके शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि गेरुआधारी सरकार में ही पुलिस साधु-संतों और ब्राह्मण बटुकों पर डंडे बरसा रही है। सनातन धर्म के प्रतीकों को रौंदा जा रहा है। उन्होंने बुधवार को लखनऊ में गोमाता का ध्वज हासिल कर धर्मयुद्ध के शंखनाद की घोषणा भी की थी।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद लखनऊ आने से पहले काशी से यात्रा निकाली। इस दौरान उन्होंने जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, मोहनलालगंज और नैमिषारण्य जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्रों पर सभाएं की हैं। आज का ‘गौ-प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ इस अभियान का निर्णायक मोड़ माना जा रहा है, जहां से गौ-रक्षा को लेकर देशव्यापी रणनीति की घोषणा की जा सकती है।

आज के मुख्य कार्यक्रम में प्रदेशभर से भारी संख्या में संत समाज और गौ-भक्तों के जुटने की संभावना है। इसे देखते हुए लखनऊ पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं।आशियाना, पीजीआई और कृष्णानगर थानों की पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। कार्यक्रम स्थल के चारों ओर अतिरिक्त पीएसी और पुलिस बल तैनात किया गया है। बताया जा रहा है कि इस तीन दिवसीय आयोजन के लिए आयोजकों ने स्मारक समिति में करीब 4.5 लाख रुपये का शुल्क जमा कराया है।

अखिलेश यादव ने शर्तों को लेकर भाजपा सरकार पर तंज कसा है उन्होंने कहा है, ‘भाजपाई सनातन का सम्मान नहीं कर सकते हैं तो भले न करें परंतु अपमान भी न करें। उप्र की अहंकारी सरकार जिस समाज विशेष के मान की बाँह मरोड़ रही है, वो बात उस समझदार समाज को समझ आ रही है। यहाँ तक कि उस समाज के जो लोग भाजपा सरकार में मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद या कहें किसी और तरह के जनप्रतिनिधि हैं, वो भी इस मामले में अपने समाज से मुँह छिपा रहे हैं लेकिन भाजपा की भट्टी पर अपने स्वार्थ की रोटी सेंकनेवाले ऐसे भाजपाई जनप्रतिनिधि, अपने ही समाज में सम्मान खो चुके हैं। जनता अगले चुनाव में उनको सबक सिखाएगी। इन जनप्रतिनिधियों में से जो कुछ लोग अपने समाज के सच्चे शुभचिंतक हैं वो उन अन्य दलों के संपर्क में हैं जो सदैव सनातन और इस समाज का सम्मान भी करते रहे हैं और जिन्होंने उन्हें सदैव यथोचित मान-स्थान भी दिया है।’

शंकराचार्य ने कहा कि स्थान किराया और अन्य शुल्क आयोजकों द्वारा देने की शर्त पर उन्होंने कहा कि मुगल शासन में भी हम जजिया कर देकर अपने धर्म का पालन करते थे। आज योगी राज में भी यदि धर्म के कार्य के लिए जजिया देना पड़े, तो हम वह भी देंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह आयोजन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए नहीं है। उनके अनुसार हिंदू और गौभक्त हर दल में हैं और जो भी व्यक्ति गौ-रक्षा के लिए आगे आना चाहता है, उसका स्वागत है। शंकराचार्य की यह यात्रा काशी से शुरू होकर कई जनपदों से होते हुए लखनऊ पहुंची है, जिसका उद्देश्य समाज में गौ-संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना बताया गया है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन शर्तों और खर्च के बारे में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह स्थिति मुगलकाल में ‘जजिया’ देने जैसी प्रतीत होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे उस समय लोग अपने धर्म के पालन के लिए जजिया देते थे, उसी प्रकार अब धार्मिक कार्यक्रमों के लिए भी खर्च उठाना पड़ रहा है। स्वामी ने पांच मार्च को वाराणसी के संकटमोचन मंदिर में पूजा करने के बाद गोरक्षा के समर्थन में अपनी यात्रा शुरू की थी।

प्रशासन की ओर से जारी शर्तों में भड़काऊ भाषण या नारेबाजी पर रोक, हथियार और आतिशबाजी पर प्रतिबंध, ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन, सीमित वाहनों की अनुमति, यातायात बाधित न करना, निजी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना और रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर बंद रखना शामिल है। किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर प्रशासन तुरंत कार्रवाई कर सकता है।

आयोजकों के अनुसार शीतला अष्टमी के दिन 11 मार्च को आशियाना स्थित कांशीराम स्मृति उपवन के पास पासी किला चौराहे पर दोपहर 2:15 बजे से शाम 5 बजे तक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इस दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ‘गो-प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ की औपचारिक शुरुआत करेंगे और समर्थकों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में संत समाज, विभिन्न संगठनों और बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर मंगलवार को लखनऊ पहुंचे और लोगों से बुधवार को होने वाले ‘गो प्रतिष्ठा-धर्मयुद्ध शंखनाद’ कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की। यह कार्यक्रम 11 मार्च को कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक उपवन में आयोजित किया जाएगा। जिला प्रशासन ने आयोजन की अनुमति 26 शर्तों के साथ दी है, जिनमें भड़काऊ भाषण, आपत्तिजनक नारेबाजी और घातक वस्तुओं के उपयोग पर प्रतिबंध शामिल है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाना उनके अभियान का मुख्य उद्देश्य है और देशभर में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध उनकी प्राथमिकता है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार को लखनऊ पहुंचे। यहां से वह 11 मार्च से प्रस्तावित तीन दिवसीय गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान की शुरुआत करेंगे। लखनऊ आगमन पर उन्होंने सबसे पहले हनुमान सेतु मंदिर में दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हो गए। आयोजकों के अनुसार 11 मार्च को शीतला अष्टमी के अवसर पर आशियाना क्षेत्र स्थित कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, पासी किला चौराहा के निकट दोपहर सवा दो बजे से शाम पांच बजे तक मुख्य सभा आयोजित होगी। इस दौरान शंकराचार्य गो-प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध का औपचारिक शंखनाद करेंगे और श्रद्धालुओं को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में संत-समाज, विभिन्न सामाजिक संगठनों तथा बड़ी संख्या में गोभक्तों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

 

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