August 6, 2026

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति की तिथि को लेकर है कंफ्यूजन, यहां जानें सही डेट, पुण्य काल और स्नान-दान का टाइम

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति को साल के पहले बड़े पर्व के रूप में देखा जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और इसी के साथ सूर्य के उत्तरायण होने की शुरुआत मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में सूर्य का उत्तरायण होना शुभ संकेत माना जाता है। शास्त्रों में मकर संक्रांति को अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक माना गया है। दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि और उत्तरायण को सकारात्मकता का प्रतीक कहा गया है। मकर संक्रांति के बाद दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं, जिससे प्रकाश बढ़ता है और अंधकार कम होता है। यही बदलाव जीवन में नई ऊर्जा और शुभ शुरुआत का संकेत माना जाता है। इस बार मकर संक्रांति की तिथि को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कहीं 14 जनवरी को पर्व मनाने की बात हो रही है तो कहीं 15 जनवरी को लेकर चर्चा है। आइए जानते हैं मकर संक्रांति की सही तिथि क्या है…

पंचांग के अनुसार 14 जनवरी 2026 को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना ही मकर संक्रांति कहलाता है। इसी आधार पर ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही मनाना उचित रहेगा। सूर्य का संक्रमण दोपहर बाद होने की वजह से तिथि को लेकर भ्रम बना हुआ है।

इस साल मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी भी पड़ रही है। करीब 23 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब संक्रांति और एकादशी एक ही दिन पड़ रही हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार संक्रांति और एकादशी का एक साथ होना अक्षय पुण्य फलदायक माना जाता है। इस दिन किया गया दान, स्नान और पूजा लंबे समय तक फल देने वाला माना गया है।

मकर संक्रांति का महापुण्य काल दोपहर 3:07 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा। इस दौरान स्नान, दान और धार्मिक कार्यों को विशेष फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस समय किया गया दान कई गुना पुण्य देता है।

मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन स्नान के बाद तिल, गुड़, चावल और वस्त्रों का दान किया जाता है। हालांकि इस बार एकादशी होने के कारण चावल से बनी खिचड़ी को लेकर संशय है। विद्वानों के अनुसार एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है, इसलिए खिचड़ी पर्व 15 जनवरी (द्वादशी) को मनाना अधिक उचित बताया जा रहा है।

स्नान के बाद सूर्य को जल अर्पित करें, जल में गुड़ या लाल फूल डाल सकते हैं।

तिल और गुड़ का दान करना शुभ माना जाता है।

जरूरतमंदों को कंबल, वस्त्र या अनाज दान करें।

घर में बुजुर्गों का आशीर्वाद लें और सकारात्मक संकल्प करें।

शाम के समय दीपक जलाकर घर में शांति का माहौल बनाएं।

मकर संक्रांति पर इन बातों का रखें ध्यान

मकर संक्रांति के दिन एकादशी भी है। एकादशी के कारण चावल या चावल से बनी चीजों का सेवन न करें।

क्रोध, विवाद और नकारात्मक बातचीत से दूरी रखें।

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