कानपुर रजिस्ट्री विभाग एक बार फिर आयकर विभाग की कार्रवाई की जद में आया है। गुरुवार को विभाग के जोन-3 में आयकर विभाग ने सर्वे किया। सिविल लाइंस स्थित कार्यालय में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। छह घंटे की जांच में लगभग 3500 करोड़ की विसंगतियों के साक्ष्य मिले हैं। आयकर विभाग को लगभग 800 करोड़ के टैक्स का चूना लगा है। फिलहाल रजिस्ट्री अधिकारियों को दस दिन का समय देकर कागजात प्रस्तुत करने को कहा गया है।
आयकर निदेशक के निर्देश पर रजिस्ट्री कार्यालय के जोन वन में सहायक निदेशक विमलेश राय की अगुवाई में अचल संपत्ति की रजिस्ट्री की जांच के लिए सर्वे किया गया। टीम में आयकर निरीक्षक कुलदीप गुप्ता, देव अनंत श्रीवास्तव, कय्यूम अहमद, रवि पासवान के साथ भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। आयकर अधिकारियों ने वर्ष 2020 से 2025 तक की रजिस्ट्री की जांच की। सर्वे टीम का कहना है कि अब तक जिन दस्तावेजों की छानबीन हुई है, उसके अनुसार 3500 करोड़ रुपये की विसंगतियां मिली हैं।
आयकर सर्वे के दौरान कई रजिस्ट्री में मनमर्जी पैन लिखा गया। लगभग एक हजार पैन में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी मिलीं। गलत मोबाइल नंबर तक लिखे गए। सर्वे टीम का आकलन है कि ऐसा जानबूझकर किया गया। इसकी आड़ में आयकर विभाग की आंखों में धूल झोंकने का पूरा प्रयास किया गया। रजिस्ट्री विभाग की ओर से संपत्तियों की रजिस्ट्री का जो डाटा आयकर विभाग को भेजा गया, वह वास्तविक रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा था।
आयकर विभाग ने वित्तीय गड़बड़ियों और टैक्स चोरी की आशंका के चलते गुरुवार को प्रमुख नमकीन कारोबारी के ठिकानों पर सर्वे की कार्रवाई की। कानपुर और कानपुर देहात के कुल पांच स्थानों पर आयकर अधिकारियों ने एक साथ धावा बोला। दोपहर से शुरू हुई यह कार्रवाई देर रात तक चलती रही। इस दौरान भारी पुलिस बल भी मौजूद रहा।
सूत्रों के अनुसार, आयकर विभाग की यह कार्रवाई कारोबारी की कानपुर देहात के रनियां क्षेत्र में स्थित फैक्टरी के अलावा कानपुर के शास्त्री नगर और दादानगर सहित अन्य ठिकानों पर की गई। सर्वे के दौरान करीब 50 से अधिक आयकर अधिकारियों की टीम मौके पर तैनात रही। अधिकारियों ने सभी परिसरों में मौजूद व्यावसायिक रिकॉर्ड, लेखा-बही और डिजिटल डेटा की गहन जांच की।
बताया जा रहा है आयकर विभाग को कारोबारी के लेनदेन और आय-व्यय के संबंध में लंबे समय से कुछ वित्तीय अनियमितताओं की जानकारी मिल रही थी। इसी आधार पर यह सर्वे कार्रवाई की गई। टीम ने मौके से अहम दस्तावेज जुटाए व कारोबारी से तीन साल पुराने खातों व दस्तावेजों की जानकारी भी मांगी गई है।
कार्रवाई के दौरान फैक्टरी और कार्यालय परिसरों में आने-जाने पर नियंत्रण रखा गया। कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई और बिक्री, कच्चे माल की खरीद व टैक्स भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए। सूत्रों का कहना है कि सर्वे में जुटाए गए दस्तावेजों और डेटा की विस्तृत जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। वहीं, सूत्रों के अनुसार, नमकीन कारोबारी की रनियां स्थित फैक्टरी में सर्वे करने पहुंचे अफसर लग्जरी बस से पहुंचे। इसके अलावा भारत सरकार लिखी पांच से छह कारें भी पहुंचीं। हालांकि किसी ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। बताया कि वरिष्ठ अफसर ही इस मामले में कुछ बताएंगे।

