दिल्ली में भाजपा मुख्यालय के रूप में दशकों तक 11 अशोक रोड का सरकारी बंगला भाजपा की पहचान रहा है। दीनदयाल उपाध्याय मार्ग मार्ग पर नए भाजपा मुख्यालय में आने के बाद भी पार्टी के नेताओं में 11 अशोक रोड दिल से जुड़ा हुआ है। दूसरे, इस नए भवन में भी 11 नंबर कक्ष काफी चर्चा में है। इस कक्ष में भी देश भर के नेता आते रहते हैं। इनमें से कई नेता उन दिनों में भी आए जब वह टिकट हासिल करने से लेकर कुछ बड़ा हासिल करने के लिए जद्दोजहद कर रहे थे।
बीते एक दशक से भी कम समय में इस कक्ष में आने वाले कई नेता मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक और बड़े पदाधिकारी भी बन गए। अंकशास्त्र के हिसाब से भी बीजेपी के तीनों अक्षरों का योग नंबर भी 11 होता है। इसलिए हर छोटे-बड़े नेता को लगता है कि 11 नंबर का बंगला शुभ है।
पुरानी लखनवी तहजीब में पहले आप, पहले आप को एक दूसरे को इज्जत देने का तरीका समझा जाता था। पर कांग्रेस के एक नेता को यह तहजीब बहुत महंगी पड़ी। हुआ यू कि एक राज्य के प्रभारी से उसी प्रदेश के दो नेता मिलने पहुंचे। प्रभारी ने उन्हें बुलाया तो वह एक दूसरे से पहले आप पहले आप करने लगे। कई बार कहने पर एक नेता मिलने गया। उसके बाद जब दूसरे नेता प्रभारी से मिलने पहुंचे और अपनी बात रखी, तो उन्हें बताया गया कि यह पद उनसे पहले आने वाले नेता को दे दिया गया है। अब बेचारे सोच रहे है कि लखनवी तहजीब निभाने के बजाए खुद ही पहले चले जाते।
उत्तर प्रदेश के एक मंत्री को लेकर सत्ता के गलियारे में इन दिनों खूब चटखारे लिए जा रहे हैं। दरअसल, यह मंत्री सरकार में रहते हुए ही पहले खुद अपने ही अधिकारियों और सरकार पर हमलावर रहते थे। उन्हें अपने सजातीय वोट बैंक को लेकर खासा दंभ रहता था। वह कई बार तो पाला बदलने तक के संकेत पार्टी संगठन के आला नेताओं को देते रहते थे। उनके इसी महत्व के चलते पार्टी हमेशा उनकी मान-मन्नोव्वल में लगी रहती थी। विधानसभा चुनावों में उन्हें अच्छी और मनमानी सीटें दी गईं लेकिन बीते कुछ दिनों से मंत्रीजी ठंडे पड़े हैं। लेकिन अब पार्टी ने उनका तोड़ ढूंढ लिया है। संगठन की कमान एक ऐसे पुराने नेता को दे दी जो मंत्रीजी के कद्दावर तो हैं ही और उनके समाज से आते हैं।

