पूर्व भारतीय क्रिकेटर और मशहूर कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने आगामी टी20 विश्व कप के समीकरणों और खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर विस्तार से चर्चा की है। भारतीय टीम के हालिया प्रदर्शन और अभिषेक शर्मा की विफलता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके खेलने के अंदाज में जोखिम ज्यादा रहता है। चोपड़ा के अनुसार, जो खिलाड़ी पहली गेंद पर छक्का लगाने की क्षमता रखता है, वह कभी-कभी शून्य पर भी आउट हो सकता है। उन्होंने भारतीय टीम को आगाह करते हुए कहा, “भारत को थोड़ा सा रियलिटी चेक तो जरूर मिला और ये शुरुआत में मिल गया जो अच्छी बात है।” उनके अनुसार द्विपक्षीय सीरीज में दबदबा बनाने के बाद इन पिचों पर खेलने के लिए ‘अहंकार को साइड में रखक’ पिच की स्थिति के अनुसार ढलना जरूरी है ताकि टीम सुपर-8 की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सके।
सेमीफाइनल की दौड़ पर अपनी राय रखते हुए आकाश चोपड़ा ने कई टीमों के समीकरणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ग्रुप-1 से भारत और दक्षिण अफ्रीका को पसंदीदा बताया, लेकिन साथ ही वेस्ट इंडीज की क्षमता को भी सराहा। चोपड़ा ने कहा, “वेस्ट इंडीज को मैं बिल्कुल भी हल्के में नहीं आने वाला, आई थिंक दे आर अ गन टीम और पॉसिबिलिटी है कि वो भी क्वालीफाई कर जाए।” दूसरे ग्रुप के बारे में उन्होंने बताया कि कोलंबो और पैलेकेले जैसे वेन्यू मैचों के परिणाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। हालांकि इंग्लैंड और न्यूजीलैंड उनकी नजर में दो बेहतरीन टीमें हैं, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान की संभावनाओं को भी खारिज नहीं किया, क्योंकि स्पिन की मददगार परिस्थितियों में उनके पास अच्छा मौका है।
चोपड़ा ने पाकिस्तान क्रिकेट के भीतर चल रहे अंदरूनी विवादों और पूर्व क्रिकेटरों के रुख पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि स्टूडियो में बैठकर पूर्व खिलाड़ी जिस तरह से वर्तमान टीम का मजाक उड़ाते हैं, वह ठीक नहीं है। उन्होंने मर्यादा बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा, “एक गरिमा उसको बना के रखना चाहिए…। वी आर फ्रॉम द सेम फैमिली एंड वी नेवर वॉश्ड डर्टी लेनिन इन पब्लिक।” उन्होंने शादाब खान जैसे खिलाड़ियों की प्रतिक्रियाओं और मीडिया में चल रही बयानबाजी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और जोर दिया कि खिलाड़ी चाहे पूर्व हो या वर्तमान, उन्हें एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए।
आकाश चोपड़ा ने पाकिस्तान क्रिकेट की एक बड़ी कमजोरी की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि पड़ोसी मुल्क में फोकस अक्सर केवल भारत को हराने पर होता है, न कि पूरा टूर्नामेंट जीतने पर। उन्होंने इसे वहां की खेल संस्कृति का हिस्सा बताते हुए कहा, “फोकस जो है वो भारत को हराने में है, खुद जीतना वर्ल्ड कप उस बारे में बात थोड़ी सी कम हो गई।” उनके अनुसार, चाहे वह हॉकी हो, फुटबॉल हो या क्रिकेट, भारत पर जीत को ही वहां पहचान का अंतिम पैमाना मान लिया जाता है, जिससे टीम का मुख्य लक्ष्य कहीं पीछे छूट जाता है।

