अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो कोई न कोई सुराग छोड़ जाता है। महज एक सुराग से पुलिस गांडीव और सुदर्शन एप की मदद से उलझी गुत्थियां सुलझा रही है। एआई आधारित ये इंटेलीजेंस टूल उन लोगों को खोजने में मददगार साबित हो रहे हैं जो पुलिस से बचने के लिए सालों से गायब हैं। पुलिस ने हाल ही में दो मामलों में इन एप की मदद से अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है। पुलिस को इन मामलों में न तो राह पता थी और न ही मंजिल।
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि जब सीसीटीवी, सर्विलांस और मुखबिर फेल हो जाते हैं तब भी पुलिस हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठती। पुलिस के पास गांडीव और सुदर्शन एप हैं। दोनों ही एआई आधारित एप हैं। वर्ष 2016 में अशोक कुमार उर्फ उमाशंकर के खिलाफ लूट के मुकदमे के बाद गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज हुआ था। आरोपित अशोक कुमार ने फर्जी जमानती लगाए थे। जेल से रिहा होने के बाद वह भूमिगत हो गया। पुलिस को उसकी तलाश थी। कोई सुराग नहीं मिल रहा था। पुलिस के पास वर्ष 2015 में गिरफ्तारी के समय ली गई उसकी एक फोटोग्राफ थी। 10 साल में उसमें क्या बदलाव आया होगा। यह मानते हुए एआई से उसका फोटो तैयार किया। फोटो को गांडीव एप पर रन कराया गया। गांडीव एप पर कई विभागों का इंटीग्रेटेड डेटा है। जो अपडेट होता रहता है। अशोक कुमार ने एक होटल में अपना आधार कार्ड लगाया था। आधार कार्ड भले ही फर्जी पते पर था, लेकिन उस पर फोटो उसी का था। गैंगस्टर का फोटो रन कराने पर पुलिस को चार-पांच लोगों के फोटो मिले। उनके बारे में छानबीन की गई। प्रयागराज में अशोक कुमार मिल गया। उसे पकड़ लिया गया।
डीसीपी पश्चिम आदित्य सिंह ने बताया कि यमुना एक्सप्रेसवे पर हत्या करके एक युवती की लाश फेंकी गई थी। युवती के हाथ पर सनी लिखा हुआ था। पुलिस ने डीसीआरबी के माध्यम से जानकारी जुटाई। कोई गुमशुदगी मैच नहीं की। जब शव मिला तो युवती का चेहरे पर खून लगा था। एक आंख बंद थी। हत्या को समय हो गया था, इसलिए चेहरा भी काला पड़ गया था। पुलिस ने एआई की मदद से खुली आंखों का फोटो तैयार किया। फोटो को सुदर्शन एप पर रन कराया। सुदर्शन एप पर सोशल मीडिया और डिजिटल स्पेस का डाटा रहता है। यह एप सोशल मीडिया पर संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी का भी अलर्ट देता है। एआई से तैयार फोटो एक युवती से मैच कर गया। पुलिस को पता चला कि उसका नाम सोनाली है। पुलिस ने सोशल मीडिया से और जानकारी जुटाई। युवती का घर खोज निकाला। हत्या का खुलासा हुआ। प्रेमी सहित तीन लोग जेल भेजे गए।
एआई आधारित एप सुदर्शन और गांडीव का एक्सिस कमिश्नरेट में पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस और तीनों डीसीपी के पास है। सारे रास्ते बंद होने पर इनकी मदद ली जाती है। सटीक परिणाम सामने आते हैं। सुदर्शन एप सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों की जानकारी देता है। इसके डेटाबेस से अपराधियों की पहचान और रिकार्ड ट्रैक करने में भी मदद मिलती है। लूट की वारदातों में अनजान बदमाशों की पहचान के लिए उनके फोटो इस पर रन कराए जाते हैं। उनमें से कोई सोशल मीडिया पर एक्टिव होता है तो उसके प्रोफाइल की जानकारी मिल जाती है। गांडीव एप नेशनल इंटेलीजेंस ग्रिड द्वारा विकसित एआई आधारित इंटेलीजेंस टूल है। यह टूल अपराधियों को ट्रैक करने और डिजिटल डेटा का विश्लेषण करने में मदद करता है। गांडीव एप की मदद से डिजिटल लेनदेन, ट्रैवल हिस्ट्री, फोन कॉल्स पैटर्न आदि की जानकारी में मदद मिलती है। इसकी मदद से संदिग्धों का चेहरा पहचानने और खोजने में भी मदद मिलती है।

