दिल्ली-NCR के आसमान में बेमौसम धुंध क्यों, क्या ईरान जंग का असर?

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दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में इन दिनों आसमान धुंधला दिख रहा है। धुंध या धूएं जैसी सफेदी ने आसमान का नीलापन छीन लिया है। अटकलें हैं कि ईरान में युद्ध और वहां इजरायल-अमेरिकी हमलों में तीन दिन से जल रहे तेल टैंकर्स का धुआं है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसकी संभावना कम है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा धुंध पाकिस्तान के बलूचिस्तान से आ रही धूल की वजह से है। ईरान वाला धुआं अभी भारत से बहुत दूर है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज बेंगलुरु के एयर पलूशन एक्सपर्ट गुफरान बेग ने कहा कि ईरान से ऊपरी वायुमंडलीय हवाएं पश्चिम की ओर बह रही हैं। आग से उठने वाला धुआं अभी तक पर्याप्त दूर तक नहीं फैला है।

बेग ने कहा, ‘उपग्रह से ली गई तस्वीरों से पता चलता है कि धुएं का गुबार लगभग 500 किलोमीटर की दूरी तय कर चुका है, जो भारत तक की दूरी का लगभग एक चौथाई है। जब तक आग तेज गति से जारी नहीं रहती और धूल भरी आंधी के साथ नहीं मिलती, तब तक इसके लंबे समय तक बने रहने और भारत की वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने की संभावना नहीं है। मंगलवार को हरियाणा से लेकर बंगाल और उससे आगे तक उत्तर भारत में कोहरा छाया रहा, और एनसीआर में सबसे कम दृश्यता सुबह 7-8 बजे हिंडन हवाई अड्डे पर 600 मीटर दर्ज की गई।

कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान के तेल ठिकानों पर बमबारी की वजह से भयानक आग लगी है और पर्यावरण पर इसका लॉन्ग टर्म में बुरा असर दिखेगा। हमलों के घंटों बाद तेहरान में काली बारिश हुई और सूरज दिखाई नहीं दिया। अटकलें थीं कि जहीराला धुआं पूरे क्षेत्र में फैलेगा और भारत तक पहुंच सकता है।

आईएमडी के प्रमुख मृत्युंजय मोहापात्रा ने कहा, ‘हवा की दिशा काले धुएं को ईरान से भारत की ओर लाने के लिए अनूकूल है। लेकिन यह भारत तक आएगा या नहीं यह कई कारकों पर निर्भर करता है जैसे धुएं का प्रकार, वायुमंडल में इसकी गहराई और हवा में कायम रहने की क्षमता। ये आईएमडी परिधि से बाहर हैं।’ मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उत्तर भारत में धुंध का निर्माण नमी से भरी पूर्वी हवाओं के कारण हुआ, जो निचले स्तरों पर शांत परिस्थितियों वाले क्षेत्र में आ रही थीं। मार्च के गर्म मौसम में धुंध/कोहरा होना दुर्लभ है, लेकिन यह अभूतपूर्व नहीं है।

आईएमडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक आरके जेनामनी ने कहा, ‘डेटा दिखाता है कि क्षेत्र में मार्च के महीनों में पहले भी घना कोहरा रहा है। 2008 में 6-8 मार्च को घने कोहरे की वजह से उत्तर भारत में पावर ट्रांसमिशन लाइंस में गड़बड़ी आ गई थी।’

स्काईमेट के महेश पलावत के अनुसार, धुंध संभवतः चल रहे पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से धूल और नमी के मिलन की वजह से थी। उन्होंने कहा कि एक और पश्चिमी विक्षोभ क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है, जिससे 14 मार्च से दिन के तापमान में मामूली गिरावट आ सकती है और 15 मार्च को बारिश की संभावना है। उन्होंने कहा, ‘यह धुंध बलूचिस्तान और थार रेगिस्तान से आ रही धूल की वजह से है।’

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