पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने भारत में भी ऊर्जा संकट बढ़ा दिया है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर इस संकट से निपटने की तैयारी कर रही हैं। इन्हीं तैयारियों का जायजा लेने के लिए कल शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक करेंगे। हालांकि, इस बैठक में उन राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं होंगे, जिनमें विधानसभा चुनाव की तारीख घोषित हो चुकी है। इस बैठक का उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के तहत ऊर्जा संकट से निपटने के लिए उठाए जा रहे सभी प्रयासों के बीच तालमेल सुनिश्चित करना है।
ईरान युद्ध के बढ़ते संकट पर राज्यसभा में दिए संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने सभी पार्टियों से एकता की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच की जंग अगर जारी रहती है, तो इसका वैश्विक स्तर पर दुष्परिणाम देखने को मिलेगा। भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। ऐसी स्थिति में आने वाला समय भारत के लिए परीक्षा की घड़ी है। इसमें राज्य सरकारों का सहयोग बेहद जरूरी है। देश को टीम इंडिया की तरह काम करना होगा और इस संकट से बाहर आना होगा।
केंद्र सरकार की तरफ से यह बैठक ऐसे समय में आयोजित की जा रही है, जब ईरान युद्ध को लेकर एक बार फिर से अनिश्चितता की स्थिति बढ़ गई है। भले ही ईरान ने होर्मुज से निकलने वाले भारतीय जहाजों को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया हो, लेकिन इसके बाद भी देश में की जगहों पर ऊर्जा संकट के लक्षण दिख रहे हैं। हालांकि, सरकार की तरफ से लगातार देश में ऊर्जा संकट की खबरों को खारिज किया जा रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए बयान में कहा कि भारत के पास पर्याप्त मात्रा में तेल और गैस के भंडार मौजूद हैं। इसके अलावा आने वाले समय में कई जहाज भी भारत पहुंचने वाले हैं। ऐसी स्थिति में जनता को घबराने की जरूरत नहीं है।
इससे पहले, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की तरफ से तेहरान पर किए गए हमले को आज 27 दिन हो चुके हैं। इस युद्ध में अभी तक 3000 से ज्यादा लोगों के मारे जा चुके हैं। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 5 दिनों के सीजफायल का ऐलान किया था, लेकिन तेहरान के ऊपर लगातार हमले जारी है और ईरान भी लगातार पलटवार कर रहा है। ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि वह बातचीत कर रहे हैं, जबकि ईरान की तरफ से ऐसी किसी भी बातचीत से इनकार किया गया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि दोनों देसों के बीच में कुछ बातों का आदान-प्रदान हुआ है, लेकिन सीजफायर को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है।

