बालेंद्र शाह उर्फ बालेन शाह ने नेपाल के नए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ले ली है। राष्ट्र्पति रामचंद्र पौडेल ने संविधान के आर्टिकल 76 (1) के तहत उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। बता दें कि नेपाल में जेन-जेड के विरोध प्रदर्शन के बाद केपी शर्मा की अगुआई वाली वामपंथी सरकार गिर गई थी। इसेक बाद देश में आम चुनाव करवाए गए। इन चुनावों में बालेन शाह की पार्टी को बड़ी जीत हासिल हुई।
जिस तरह से युवाओं ने नेपाल की राजनीति में बड़ा परिवर्तन करने के लिए कमर कसी थी उसी तरह से एक नवयुवक को नेपाल की बागडोर भी थमा दी गई है। नेपाल में लोकतंत्र लागू होने के बाद पहली बार है जब किसी दल को पूर्ण बहुमत मिला है। नेपाल की जनता भ्रष्टाचार और राजनीति में भाई-भतीजावाद से त्रस्त थी। ऐसे में एक युवक को प्रधानमंत्री बनाते हुए जनता बड़ी उम्मीदें लगाए हुए है।
बालेन शाह एक मशहूर नेपाली रैपर हैं। राजनीति में आने से पहले वह संगीत के माध्मय से ही सामाजिक मुद्दों को उठाते रहते थे और राजनीति पर भी तीखा तंज कसते थे। ऐसे में नेपाल में उनकी लोकप्रियता काफी ज्यादा थी। सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भी उनके गाने खूब बजाए जाते थे। पीएम बनने से पहले भी उन्होंने नेपाली युवाओं के लिए एक उम्मीदों से भरा गीत रिलीज किया है। इसके बोल हैं, ‘एकजुट नेपाली, इस बार इतिहास रचा जा रहा है।’
बालेन शाह 2022 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर काठमांडू के मेयर चुने गए थे। 2026 में उन्होंने मेयर के पद से इस्तीफा दे दिया और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) में शामिल हो गए। इसी पार्टी में रहते हुए उन्होंने 2026 का आम चुनाव लड़ा। 2026 के चुनाव में आरएसपी को 275 में से 182 सीटों पर जीत हासिल हुई और बालेन शाह को संसदीय दल का नेता चुन लिया गया। बालेन शाह ने झापा-5 सीट से पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली को बड़े अंतर से हराया है।
नेपाल में बालेन शाह सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री हैं। बालने शाह मधेसी मुल हैं और वह मैथिली भाषा बोलते हैं। कर्नाटक से ही उन्होंने स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रैजुएशन किया था। ऐसे में भारत के साथ उनके संबंध मजबूत माने जाते हैं।
बालेन शाह का जन्म 1990 में काठमांडू के नारादेवी में हुआ था। उनके पिता डॉक्टर हैं और माता जी गृहिणी हैं। शाह का विवाह हो चुका है और उनकी एक बेटी भी है। 2013 में शाह ने नेपाल में एक बड़ा रैप बैटल जीता था और इसके बाद ही वह दिनों दिन फेमस होते चले गए। उनका सबसे मशहूर गाना ‘बलिदान’ बताया जाता है। काठमांडू के मेयर रहते हुए ही उन्होंने अपने कामकाज से पहचान बना ली थी।
बालेन शाह की आलोचना भी कम नहीं होती है। मेयर रहते हुए मानवाधिकार संगठनों ने उनकी काफी आलोचना की थी। उनका कहना था कि सड़कों को साफ रखने और बिना लाइसेंस वाले कारोबारियों के खिलाफ उन्होंने कड़े कदम उठाए थे जिससे जनता को परेशानी हुई। रेड़ी पटरी पर सामान बेचने वालों के खिलाफ भी अभियान चलाया गया था। कई जगहों पर दुकानों में तोड़फोड़भी हुई। इसको लेकर ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी आलोचना की थी।

