भगवान एक बार में करोड़ों लोगों के मन की कैसे सुनते हैं? जानें प्रेमानंद महाराज का जवाब

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मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध प्रेमानंद महाराज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनके दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। भक्त उनसे अपने मन की जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त करते हैं। प्रेमानंद महाराज जी से लोग तरह-तरह के प्रश्न पूछते हैं, जिनका वे बहुत ही सरल और सहज तरीके से उत्तर देते हैं।। ऐसे ही एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज जी से पूछा कि कण-कण में भगवान हैं, तब एक ही समय में करोड़ों-अरबों के मन की बात कैसे सुन और समझ लेते हैं। चलिए जानते हैं कि महाराज जी ने क्या जवाब दिया।

इस सवाल का जवाब देते हुए महाराज जी कहते हैं कि इन्द्रियाणां मनश्चास्मि। वही मन बने हुए हैं। भगवान कह रहे हैं कि इंद्रियों में मन मैं हूं। तो आप कैसे कह सकते हो कि वो कैसे सुन लेते हैं। वो मन ही बने हैं। सबके मन वही बने हुए हैं। जैसे एक शीशा में देखो, तो हम अकेले और करोड़ो शीशा तोड़कर के मकान बना दो और उसमें तुम देखो, तो तुम ही दिखाई दोगे ना। तो अब करोड़ों दिखाई दे रहे हो, लेकिन हो तुम ही। ऐसे ही एक भगवान सच्चिदानंद।

महाराज जी कहते हैं कि ये करोड़ों शरीर दिखाई दे रहे हैं और वो सबके मन में बैठा हुआ है। सबकी सुन रहा है। हम लोग प्राकृतिक बुद्धि वाले हैं। हमारी प्राकृतिक शरण इंद्रिय है, तो 100 आवाज हम एक साथ नहीं सुन सकते हैं। लेकिन वो एक साथ एक अरब आवाज सुनकर एक अरब लोगों को उत्तर देते हैं इसलिए वो भगवान है, परमात्मा है। ऐसे में उनकी सामर्थ्य तो अनंत है। महाराज जी कहते हैं कि वो अंगुली से सुन सकते हैं। जबकि अंगुली में श्रवण इंद्री थोड़ी है। पर वो अंगुली से सुन सकते हैं।

महाराज जी कहते हैं कि वो कान से खा सकते हैं, वो पैर से सूंघ सकते हैं। सबकुछ सच्चिदानंद में सामर्थ होती है। अपने लोग यानी प्राकृतिक लोग सिर्फ कान से ही सुन सकते हैं और 100 आवाजें हो रही हों, तो हम पहचान नहीं सकते हैं कि कौन क्या बोल रहा है। लेकिन वो असंख्य लोग बोले एक साथ तो सबको उत्तर भगवान दे देंगे। भगवान, भगवान हैं। वही सबकी आत्मा बने हुए हैं, वही सबकी बुद्धि बनी हुए हैं। सही पूछो तो वही सबकुछ बने हुए हैं। उनके सिवाय कुछ है ही नहीं। तो अपनी बात अपने सुन लेते हैं ना, ऐसे ही भगवान सबकी बात सुन लेते हैं।

 

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