राहुल गांधी के हमलों के बीच मोदी सरकार के समर्थन में आए शशि थरूर, इस फैसले का किया समर्थन

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 एक तरफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनके साथी हमला करके केंद्र सरकार को असहज करने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस सांसद शशि थरूर कई सरकार के फैसलों के पक्ष में खड़े दिख रहे हैं। गृहमंत्री अमित शाह द्वारा देश में हो रहे अस्वाभाविक डेमोग्राफिक बदलाव की जांच के लिए गठित की गई समिति का थरूर ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हमें यह समझना होगा कि हम किन बदलावों से गुजर रहे हैं।

केंद्र सरकार के इस फैसले पर अभी तक कांग्रेस पार्टी की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। लेकिन थरूर ने सार्वजनिक रूप से इसका स्वागत कर दिया है। न्यूज 18 से बात करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा, “केंद्र सरकार द्वारा लिया गया यह फैसला बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। हमें यह समझना होगा कि हम किन बदलावों से गुजर रहे हैं। कई तरह की चीजें हो रही है। हालांकि मुझे लगता है कि हमें इस फैसले के राजनीतिक प्रभाव पर भी बात करनी होगी।”

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए थरूर ने कहा, “हालांकि हमें देखना होगा कि समिति सही आंकड़े उपलब्ध कराए। क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता है तो लोग इसका दुरुपयोग भी कर सकते हैं। आंकड़े अगर अधूरे हुए तो इससे विवाद भी खड़ा हो सकता है।”

बता दें, कांग्रेस सांसद शशि थरूर की तरफ से यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब कुछ समय पहले ही गृहमंत्री अमित शाह ने देश में हो रहे ‘अस्वाभाविक जन सांख्यिकीय परिवर्तन’ की जांच करने के लिए एक हाई प्रोफाइल समिति बनाने का ऐलान किया था। सोशल मीडिया साइट एक पोस्ट के जरिए इसका ऐलान करते हुए शाह ने कहा, “घुसपैठ और अन्य कारणों की वजह से होने वाले अस्वाभाविक जन सांख्यिकीय परिवर्तन किसी भी देश के वर्तमान और भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसी चुनौती से निपटने के लिए 15 अगस्त 2025 को समिति बनाने का ऐलान किया था। सरकार ने इस समिति की स्थापना कर दी है।”

सरकार की तरफ से जारी सूचना के मुताबिक इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर करेंगे। इनके अलावा इसमें पूर्व IAS अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व IPS अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री शामिका रवि शामिल होंगे। इसके अलावा जनगणना आयुक्त भी इसके सदस्य होंगे।

आपको बता दें, भारतीय जनता पार्टी लगातार सीमाई क्षेत्रों में होने वाले जनसंख्या परिवर्तन का मुद्दा उठाती आ रही है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा कर बार दावा कर चुके हैं कि बांग्लादेश से आने वाले लोगों ने असम की डेमोग्राफी को पूरी तरह से बदल दिया है। अगर यह रफ्तार इसी तरह से चलती रही, तो असमिया लोग अपने ही राज्यों में अल्पसंख्यक हो जाएंगे। दरअसल, यह केवल असम की समस्या नहीं है, पूर्वोत्तर के तमाम राज्यों में यह समस्या है कि बांग्लादेश से आने वाले लोग लगातार इन राज्यों में बस रहे हैं जिसकी वजह से वहां की डेमोग्राफी बदल रही है। भाजपा पूर्वोत्तर यहां तक की तमाम चुनाव इसी मुद्दे पर लड़ती है। हाल ही में असम और पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने के बाद भारतीय जनता पार्टी की दोनों राज्य सरकारों ने घुसपैठियों को लेकर अपने अभियान तेज कर दिए हैं।

 

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