चार साल पहले सरकार अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण शुरू होने से पहले हुए जमीन घोटाले में कड़ी कार्रवाई कर देती तो चढ़ावा चोरी का प्रकरण यूं सिरदर्द न बनता और न ट्रस्ट से लेकर शासन- प्रशासन की विपक्ष फजीहत कर पाता। अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण शुरू होने से पहले आर्थिक गतिविधियां भी बढ़नी शुरू हो गई थीं। रामनगरी पर उद्यमियों ही नहीं, नेताओं, बिल्डरों के करीबी अफसरों, प्रॉपर्टी डीलरों, बिल्डरों तक की निगाहें थीं।
अयोध्या में प्रशासन व पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही अन्य रसूखदारों के जमीनों की धड़ल्ले से खरीद किए जाने का मामला दिसंबर 2021 में उठा था। आरोप था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अयोध्या में अफसर, सफेदपोशों की मिलीभगत से खरीद-फरोख्त की गई थी। खासकर अयोध्या में तैनात रहे अधिकारियों पर इस खेल में शामिल होने की बात कही गई थी। कई अधिकारियों व सफेदपोशों के रिश्तेदारों के नाम जमीन खरीदे जाने के कुछ दस्तावेज भी सामने आए थे।
सूत्रों के अनुसार जांच में जमीनों की खरीद-फरोख्त में कानूनी पेंच तो सामने नहीं आया था पर अफसरों की भूमिका पर रिपोर्ट में नैतिकता, कर्तव्यनिष्ठा पर सवाल किया गया था। जांच का दायरा सीमित रहा था, जिसे बढ़ाया नहीं गया। अब सवाल है कि तब अयोध्या में सिलसिलेवार गहनता से वृहद जांच कराई गई होती तो धांधली उजागर होती। ट्रस्ट की जमीनों को खरीदने वालों की आय-व्यय की जांच में रसूखदारों की बेनामी संपत्तियां भी बेनकाब होतीं।
चढ़ावा चोरी की जांच की आंच जमीन घोटाले तक पहुंच गई है। पुलिस टीम अभी चोरी के आरोपियों से ही पूछताछ कर मामले की छानबीन में व्यस्त है। इसके चलते अभी तक जमीन प्रकरण मामले में हाथ नहीं डाला है फिर भी पुलिस ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से नजूल जमीन का सौदा करने या कराने वाले बिचौलियों को सूचीबद्ध कर लिया है। इन सभी को पुलिस ने जांच में सहयोग – की कड़ी हिदायत दी है कि कोई असहयोग करता पाया गया तो उसके खिलाफ एक्शन तत्काल होगा।
उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रुख देखते हुए बिचौलिए और उनके परिजन काफी सहमे हैं। मुख्यमंत्री ने चढ़ावा मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी का कार्यकाल बढ़ा दिया है। इसके बाद एसआईटी यहां पहुंच गई है। माना जा रहा है कि एसआईटी ही जमीन मामले की तह तक जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा अनियमितता का प्रमाण होने पर एसआईटी को शिकायती पत्र देने के ऐलान के बाद आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने प्रॉपर्टी संबंधी शिकायत सप्रमाण एसआईटी के अधिकारियों को सौंपी है।

