भगवान राम जब अपने भाई लक्ष्मण के नहीं हुए तो…, चंपत राय का वीडियो वायरल, केस के लिए तहरीर

Breaking India News Uttar Pradesh

अयोध्या राम मंदिर दान चोरी के मामले में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय पर केस दर्ज करने के लिए एक और तहरीर पुलिस को दी गई है। चंपत राय के एक वायरल वीडियो का हवाला देते हुए रामजन्मभूमि थाने में रामजानकी मंदिर के महंत संत दास उर्फ राजेश सिंह मानव ने धार्मिक भावनाएं आहत करने और जमीन-फरोख्त मामले में केस दर्ज करने के लिए तहरीर दी है। उन्होंने थाने के सामने नारेबाजी कर प्रदर्शन भी किया है। इससे पहले आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और धर्मसेना प्रमुख संतोष दुबे ने एफआईआर के लिए पुलिस को तहरीर दी थी।

एक समाचार चैनल पर इंटरव्यू का हवाला देते हुए संत दास का आरोप है कि चंपत राय एक वीडियो क्लिप में कहते सुनाई दे रहे हैं कि हमको रामराज्य नहीं चाहिए, भगवान राम अपने भाई लक्ष्मण के नहीं हुए तो हम लोगों के क्या होंगे। उन्होंने चंपत राय को रामद्रोही और राम राज्य से घृणा करने वाला बताया। उन्होंने बताया कि कई लोगों का मकान ढहा दिया गया और एक रुपया मुआवजा नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया है कि चंपत राय ने वक्फ और सोसाइटी की जमीन खरीदी है। उन्होंने कहा कि घोटाले की गंभीरता और निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए।

साक्षात्कार का एक वीडियो वायरल है, हालांकि हिन्दुस्तान इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। वीडियो में चंपत राय यह कहते हुए सुने जा रहे हैं कि रामराज्य बहुत कठिन है, रामराज्य लाने से मैं ही डरता हूं। राम ने अपने भाई को भी नहीं बख्शा इसलिए रामराज्य की मैं कल्पना नहीं करता, जो करते हों वो करें। मगर अयोध्या में लाखों लोग आएंगे यह हम कल्पना कर रहे हैं। वह सड़क, हवाई जहाज और ट्रेन से आएंगे, इसलिए सड़कें कितनी चौड़ी होंगी, रेलवे ट्रैक कितने बड़े होंगे, प्लेटफार्म कितने लंबे हों, रुकने के लिए स्थान कैसे हों, सफाई में नंबर एक अयोध्या हो, इसकी जिम्मेदारी सरकारों को संभालनी होगी। बातचीत के आधार पर लग रहा है वीडियो तीन से चार वर्ष पुराना है।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से एसआईटी को अब तक जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने और संरचना का पूरा विवरण देने के निर्देश के बाद जांच प्रक्रिया और आगे बढ़ने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। साथ ही फाइनल रिपोर्ट में पूछताछ में शामिल हो चुके ट्रस्टियों पर भी केस दर्ज होने की तलवार लटकने लगी है।

एसआईटी गठन के साथ शासन का निर्देश था कि पहले सात दिन में प्रारंभिक और 15 दिन में फाइनल रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद जांच प्रक्रिया की समय सीमा को और बढ़ा दिया गया। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, परत दर परत राम मंदिर परिसर के अंदर व्यवस्था में व्यापक स्तर पर झोल दिखने लगा। इसी दौरान विपक्ष ने जमीन घोटाले के जिन्न को बाहर निकाल दिया। देखते-देखते यह भी मुद्दा बन गया।

अधिकारियों ने आरोप लगाने वालों से सत्यता की पुष्टि के लिए कागजात भी मांगे, जिसे आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और हिंदूवादी संगठन के मुखिया संतोष दुबे ने सौंपा है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश ने जांच को और विस्तार दे दिया है। सूत्र बताते हैं कि प्रारंभिक रिपोर्ट शुरुआती जांच के आधार पर बनाई गई थी लेकिन इसके बाद जांच को विस्तार मिल गया है।

चढ़ावा चोरी के साथ अब रिपोर्ट में यह भी सामने आ जाएगा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अभी तक जमीन की खरीद व्यवस्थागत तरीके से की है या इसमें भी अनियमितता है। सूत्र बताते हैं कि ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई कुछ जमीनों को सही नहीं कहा जा सकता है। वहीं दूसरी तरफ चढ़ावा केस में जिम्मेदारी का निर्वहन सही तरीके से न करने के तथ्य सामने आ चुके हैं।

 

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *