संसद में आज महासंग्राम: विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब दे सकते हैं अमित शाह, परिसीमन और FCRA विधेयक पर सबकी नजर
संसद के मानसून सत्र में आज विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 पर महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर सदन में आज अपना बयान दे सकते हैं।
सरकार इस विधेयक को संसद में पेश कर चर्चा और पारित कराने की तैयारी में है। यह अमित शाह का मौजूदा संसदीय गतिरोध के बीच पहला बड़ा भाषण होगा। संसद में परसीमन को लेकर काफी गतिरोध चल रहा है। राहुल गांधी लगातार सरकार को घेर रहे हैं।
वहीं, एफसीआरए विधेयक का मकसद विदेशी फंडिंग नियमों को और सख्त बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना बताया जा रहा है। इसमें एनजीओ और संगठनों के लिए सख्त पंजीकरण, ऑडिट, रिपोर्टिंग और संपत्ति संबंधी प्रावधान शामिल हैं।
विपक्ष ने संसद में अन्य मुद्दों पर भी अमित शाह के बयान की मांग की है, जिसके चलते सदन का कामकाज प्रभावित हो रहा है। बावजूद इसके, सरकार मानसून सत्र में ही इस बिल को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात में एफसीआरए संशोधन विधेयक पर अमित शाह के बोलने का प्रस्ताव रखा है।
इसी दौरान शाह विपक्ष के आरोपों का जवाब भी दे सकते हैं। दरअसल, मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों में शाह की अनुपस्थिति को मुद्दा बनाकर विपक्ष संसद नहीं चलने दे रहा है। साथ ही जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ज्यादती पर गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहा है।
पिछले ढाई हफ्ते से संसद के भीतर चल रहे गतिरोध को तोड़ने की सरकार की ओर से पहली बार गंभीर कोशिश शुरू हुई है। इसके तहत ही सदन के भीतर गृह मंत्री की अनुपस्थिति और जंतर-मंतर पर प्रदर्शकारियों पर पुलिस ज्यादती के आरोपों पर बयान की विपक्ष की मांग पर बीच का रास्ता निकालते हुए सरकार की ओर से एफसीआरए पर शाह के बोलने का भरोसा दिया।
दरअसल, जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों व पुलिस के बीच हिंसक झड़प की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट कर रहा है। कोर्ट ने आश्वस्त किया है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वाले अपराधियों व छात्रों पर ज्यादती करने वाले पुलिसकर्मियों में से किसी को नहीं बख्शा जाएगा।
