यूपी में MLC चुनाव से अचानक पीछे हटी कांग्रेस, एक साल से कर रही थी तैयारी; सपा डटी
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव से कांग्रेस ने खुद को अलग कर लिया है। पार्टी ने करीब एक साल तक इन चुनावों की तैयारी करने के बाद उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है। कांग्रेस का कहना है कि उसका पूरा ध्यान अब 2027 के विधानसभा चुनाव पर है।
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कांग्रेस की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने कहा कि एमएलसी चुनाव नहीं लड़ने का फैसला उनके पद संभालने से पहले ही लिया जा चुका था। उन्होंने कहा कि पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है।
कांग्रेस के चुनाव से हटने के बाद मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच रह गया है। हालांकि कई निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं।
कांग्रेस ने इन विधान परिषद चुनावों के लिए काफी पहले से तैयारियां शुरू कर दी थीं। पिछले साल अक्टूबर में पार्टी ने कई सीटों के लिए संभावित उम्मीदवारों के नामों का संकेत दिया था। इसके अलावा पर्यवेक्षक और समन्वयक नियुक्त किए गए थे और एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया था।
कई संभावित उम्मीदवार करीब नौ महीने पहले से ही चुनाव की तैयारी में जुटे थे। इन निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदाता सूचियां तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही उन्होंने अपना काम शुरू कर दिया था।
इन सीटों पर केवल पंजीकृत स्नातक और शिक्षक ही मतदान कर सकते हैं। ऐसे में संभावित उम्मीदवार आमतौर पर काफी पहले से प्रचार शुरू कर देते हैं। इसका मकसद पात्र मतदाताओं का नाम सूची में दर्ज कराने के साथ-साथ निर्वाचन क्षेत्र में अपना नेटवर्क तैयार करना होता है।
विधानसभा या लोकसभा चुनाव से अलग इन निर्वाचन क्षेत्रों के एमएलसी चुनाव पार्टी के चुनाव चिह्न पर नहीं लड़े जाते। हालांकि राजनीतिक दल जिन उम्मीदवारों का समर्थन करते हैं, उन्हें संबंधित पार्टी की चुनावी ताकत का हिस्सा माना जाता है।
कांग्रेस के पीछे हटने के फैसले के पीछे पार्टी और समाजवादी पार्टी के गठबंधन को बनाए रखना भी एक अहम वजह बताई गई है। पार्टी नेतृत्व का आकलन है कि विधान परिषद चुनाव में समाजवादी पार्टी के खिलाफ सीधे मुकाबले से बचने पर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन को बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही कांग्रेस अपने संगठनात्मक और राजनीतिक संसाधनों को बड़े चुनाव यानी 2027 के विधानसभा चुनाव पर केंद्रित करना चाहती है।
कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे कई उम्मीदवार अब निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतर गए हैं। वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से तैयारी कर रहे अरविंद सिंह पटेल ने 5 अक्टूबर को नामांकन दाखिल किया। उन्होंने कहा कि वह अपना नामांकन वापस नहीं लेंगे और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगे। उनके मुताबिक, उन्होंने चुनाव की तैयारी में काफी मेहनत और पैसा लगाया है।
6 अक्टूबर नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख थी। अंतिम दिन 51 उम्मीदवारों ने पर्चे दाखिल किए। 11 स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में कुल नामांकन की संख्या 5 अक्टूबर तक के 137 से बढ़कर 188 हो गई। नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को हुई, जबकि उम्मीदवारों के नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 9 अक्टूबर है।
100 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधान परिषद में फिलहाल समाजवादी पार्टी के 10 सदस्य हैं। यह संख्या सदन में नेता प्रतिपक्ष का पद पाने के लिए जरूरी 10 फीसदी की सीमा के बराबर है। वहीं बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास विधान परिषद में 83 सदस्य हैं। इनमें बीजेपी के 79 सदस्य हैं, जबकि अपना दल (एस), आरएलडी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और निषाद पार्टी के एक-एक सदस्य हैं। इस तरह गठबंधन के पास सदन में स्पष्ट बहुमत है।
