पश्चिम में भाजपा तो पूरब में दिखा सपा का दम, कैसा रहा स्कोर; यूपी MLC चुनाव की 5 बड़ी बातें
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 11 सीटों के नतीजों ने भाजपा और समाजवादी पार्टी, दोनों को सियासी संदेश दिया है। भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज कर कुछ हद तक अपना दबदबा कायम रखा, जबकि सपा ने पांच सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई है। पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की, वहीं वाराणसी और लखनऊ जैसे अहम क्षेत्रों में सपा की सफलता ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया। ऐसे में सवाल है कि क्या एमएलसी चुनाव के ये नतीजे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश के क्षेत्रीय सियासी समीकरणों की झलक देते हैं?
चुनाव परिणामों में भाजपा ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की छह सीटों में से चार पर जीत दर्ज की, जबकि सपा को दो सीटें मिलीं। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा ने दो और सपा ने तीन सीटों पर कब्जा जमाया।
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मुकाबला बेहद करीबी रहा। यहां भाजपा के ध्रुव त्रिपाठी ने निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव को महज 307 वोटों से हराया। त्रिपाठी को 16,790 वोट मिले। इस सीट पर जीत-हार का फैसला दूसरी वरीयता के मतों की गिनती के बाद हुआ।
यह त्रिपाठी की लगातार चौथी जीत है। इससे पहले वह तीन बार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीत चुके थे। हालांकि, बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए थे। जीत के बाद त्रिपाठी ने अपने प्रतिद्वंद्वी राजीव यादव के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके प्रतिद्वंद्वी ने कड़ी चुनौती पेश की और शिक्षकों का भरोसा जीता।
आगरा-अलीगढ़ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के आकाश अग्रवाल ने भाजपा के हरि किशोर तिवारी को 4,263 वोटों से शिकस्त दी। वहीं, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के हरि सिंह ढिल्लों ने सपा के दानिश अख्तर को 17,676 वोटों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी। मेरठ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के श्रीचंद शर्मा ने सपा के नितिन तोमर को 13,241 वोटों से पराजित किया।
लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के उमेश द्विवेदी ने सपा के सुशील कुमार को 4,808 वोटों से हराया। वहीं, वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के लाल बिहारी यादव ने भाजपा के प्रमोद मिश्रा को 4,898 वोटों से हराकर अपनी सीट बचा ली।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा की कांती सिंह ने भाजपा के अवनीश कुमार सिंह को हराकर पिछली हार का बदला लिया। कांती सिंह ने 17,225 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें 56,905 वोट मिले, जबकि भाजपा के अवनीश कुमार सिंह को 39,778 वोट हासिल हुए।
कांती सिंह ने 2014 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर यह सीट जीती थी, लेकिन 2020 के चुनाव में उन्हें अवनीश कुमार सिंह के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर जीतने वाले निर्दलीय एमएलसी आकाश अग्रवाल बाद में सपा में शामिल हो गए थे। इस बार उन्होंने सपा के आधिकारिक उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।
वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के आशुतोष सिन्हा ने भाजपा के केदारनाथ सिंह के खिलाफ मजबूत बढ़त बनाई। चौथे दौर की मतगणना के बाद सिन्हा को दूसरी वरीयता के 22,599 वोट मिले, जबकि केदारनाथ सिंह के खाते में 15,404 वोट आए। इस तरह सिन्हा ने 7,195 वोटों की बढ़त हासिल कर ली।
मेरठ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के दिनेश कुमार गोयल ने सपा के परमेंद्र सिंह को करीब 13,000 वोटों से हराया। भाजपा के ही मानवेंद्र प्रताप सिंह ने आगरा स्नातक सीट पर सपा के शशांक यादव को 8,856 वोटों से शिकस्त दी। इन दोनों सीटों पर भाजपा ने 2020 के चुनाव में भी जीत दर्ज की थी।
इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के मान सिंह यादव ने भाजपा के अशोक कुमार राठौर को 27,663 वोटों से हराया। इस जीत के साथ सपा ने अपनी सीट पर कब्जा बरकरार रखा। वहीं, भाजपा ने बरेली-मुरादाबाद और मेरठ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी सीटें बचाने में सफलता हासिल की। कुल मिलाकर, 11 सीटों के इस मुकाबले में भाजपा छह और सपा पांच सीटों पर जीत के साथ विधान परिषद चुनाव में आमने-सामने रहीं।
एमएलसी चुनाव में भाजपा ने 11 में से छह सीटों पर जीत दर्ज की। पार्टी ने 2020 में जीती छह सीटों में से पांच पर अपना कब्जा बरकरार रखा, जबकि एक सीट गंवा दी। यह नतीजा बताता है कि भाजपा का प्रदर्शन कई क्षेत्रों में मजबूत रहा, लेकिन सभी सीटों पर अपनी पकड़ बनाए रखना उसके लिए आसान नहीं रहा। अगले साल विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के सामने अपने मजबूत क्षेत्रों में समर्थन बनाए रखने की चुनौती होगी।
समाजवादी पार्टी ने एमएलसी चुनाव में पांच सीटें जीतकर भाजपा को कड़ी चुनौती दी। पार्टी ने अपनी मौजूदा सीटें बचाने के साथ दो अतिरिक्त सीटों पर भी जीत दर्ज की। यह प्रदर्शन सपा के लिए उत्साह बढ़ाने वाला है। हालांकि, विधान परिषद चुनाव के नतीजों को सीधे विधानसभा चुनाव का संकेत नहीं माना जा सकता, लेकिन इससे विपक्ष को अपनी राजनीतिक रणनीति मजबूत करने का आधार जरूर मिल सकता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के उम्मीदवारों ने कई सीटों पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की। मेरठ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के दिनेश कुमार गोयल ने सपा उम्मीदवार को करीब 13 हजार वोटों से हराया। बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में हरि सिंह ढिल्लों ने 17,676 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। ये नतीजे संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा की मजबूत स्थिति दिखाते हैं। हालांकि, विधानसभा चुनाव में भी यही प्रदर्शन दोहराया जाएगा या नहीं, यह अलग-अलग क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।
एमएलसी चुनाव में भाजपा को लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट गंवानी पड़ी। कांती सिंह ने भाजपा के अवनीश कुमार सिंह को 17,225 वोटों के अंतर से हराया। कांती सिंह ने इससे पहले 2020 के चुनाव में इसी सीट पर हार का सामना किया था। इस बार उनकी जीत भाजपा के लिए झटका मानी जा सकती है। अगले साल विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजधानी क्षेत्र में पार्टी की रणनीति और स्थानीय समीकरणों पर चर्चा तेज हो सकती है।
जहां पश्चिमी यूपी में भाजपा ने परचम लहराया तो वहीं पूर्वी यूपी में वाराणसी जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में सपा का दबदबा रहा। यहां सपा ने शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी सीटें बरकरार रखीं। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में लाल बिहारी यादव ने भाजपा के प्रमोद मिश्रा को 4,898 वोटों से हराया। वहीं, वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के आशुतोष सिन्हा ने मतगणना के दौरान भाजपा के केदारनाथ सिंह पर निर्णायक बढ़त बनाई थी। ये नतीजे वाराणसी में सपा की मौजूदगी को दिखाते हैं।
