October 29, 2026

MLC चुनावः पीएम मोदी के वाराणसी में भाजपा की हार के मायने, क्या सपा विधानसभा में भी भुना पाएगी इसे?

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भले ही 28 विधान परिषद सीटों के चुनाव नतीजों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में उसे झटका लगा है।

उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने वाराणसी शिक्षक सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। वहीं, स्नातक सीट पर भी उसके उम्मीदवार ने आशुतोष सिन्हा ने जीत दर्ज कर ली है। उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों में से भाजपा ने छह और सपा ने पांच सीटें जीती हैं। पिछली बार इन 11 सीटों में से सपा ने केवल तीन सीटें जीती थीं। यह विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले सपा के लिए बड़ी कामयाबी होगी।

वाराणसी स्नातक सीट पर मतगणना के दौरान दोनों दलों के बीच खींचतान जारी है। मतगणना शुरू हुए करीब 49 घंटे बीत चुके हैं। भाजपा और सपा के नेता मतगणना केंद्र पर धरने पर बैठ गए हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गड़बड़ी करने के आरोप लगा रहे हैं।

विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव से सभी जातियों और उम्र के मतदाताओं के रुझान का पता नहीं चलता, लेकिन इनके नतीजे पढ़े-लिखे तबके की सोच और मौजूदा मुद्दों पर उसकी राय का संकेत जरूर देते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में बेरोजगारी और पेपर लीक के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच इन चुनावों के नतीजे और भी अहम हो गए हैं।

सपा के लाल बिहारी यादव ने वाराणसी शिक्षक सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। उन्होंने भाजपा के प्रमोद कुमार मिश्र को 5,015 वोटों से हराया। 2020 के चुनाव में भाजपा ने चेत नारायण सिंह का समर्थन किया था, लेकिन इस बार वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे। वह तीसरे स्थान पर रहे।

2020 के चुनाव में भी समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने प्रमोद कुमार मिश्र को हराया था। उस समय मिश्र निर्दलीय उम्मीदवार थे और लाल बिहारी यादव ने उन्हें 936 वोटों से मात दी थी। भाजपा समर्थित मौजूदा विधान परिषद सदस्य चेत नारायण सिंह तब भी तीसरे स्थान पर रहे थे।

वाराणसी स्नातक सीट पर सपा के मौजूदा विधान परिषद सदस्य आशुतोष सिन्हा बड़ी जीत की ओर बढ़ रहे हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक, इस बार उनकी जीत का अंतर 2020 के मुकाबले काफी अधिक रहने की संभावना है। 2020 में आशुतोष सिन्हा ने भाजपा के केदारनाथ सिंह को 3,850 वोटों से हराया था। इस बार भी केदारनाथ सिंह दूसरे स्थान पर हैं।

वाराणसी स्नातक सीट पर मतगणना 49 घंटे से अधिक समय से जारी है। इस बीच मतगणना केंद्र पर राजनीतिक गहमागहमी बढ़ गई है। भाजपा और सपा, दोनों ने अपने कार्यकर्ताओं को वहां पहुंचा दिया है।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर पार्टी कार्यकर्ताओं से मतगणना केंद्र नहीं छोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता जीत का प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही वहां से निकलें।

अखिलेश यादव ने मतगणना केंद्र के बाहर बैठे पार्टी नेताओं की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “सभी लोग डटे रहें और जीत का प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही वहां से निकलें।” उन्होंने वाराणसी में पार्टी कार्यकर्ताओं से अपने साथियों के लिए खाने-पीने का इंतजाम करने और उन्हें पानी, छाते व तौलिये उपलब्ध कराने की अपील भी की। उन्होंने कार्यकर्ताओं का हौसला बनाए रखने को कहा।

इससे पहले अखिलेश यादव ने मतगणना की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने एक पोस्ट में लिखा, “सुनने में आ रहा है कि वाराणसी में दोबारा मतगणना की खबर के बाद लोग मतगणना केंद्र पर गंगाजल लेकर पहुंच रहे हैं, ताकि अधिकारियों को इसे हाथ में लेकर अपनी ईमानदारी साबित करनी पड़े।”

बुधवार देर रात भाजपा उम्मीदवार केदारनाथ सिंह ने मतगणना में गड़बड़ी और नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाते हुए दोबारा मतगणना की मांग की।

ताजा जानकारी के मुताबिक, सपा के उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा अपने भाजपा प्रतिद्वंद्वी से काफी आगे चल रहे थे।

वाराणसी मंडल की स्नातक और शिक्षक सीटों के दायरे में आठ जिले आते हैं। इनमें बलिया, गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी, चंदौली, भदोही, मिर्जापुर और सोनभद्र शामिल हैं। इन आठ जिलों में विधानसभा की कुल 47 सीटें हैं।

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने इनमें से 28 सीटें जीती थीं। भाजपा को 22 सीटें मिली थीं, जबकि अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी ने तीन-तीन सीटें जीती थीं।

सपा ने 14 सीटों पर जीत दर्ज की थी। उस समय उसकी सहयोगी रही ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने चार सीटें जीती थीं। बची हुई एक सीट बहुजन समाज पार्टी के खाते में गई थी। ओम प्रकाश राजभर की पार्टी अब राजग का हिस्सा है और वह उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

भाजपा ने इन आठ जिलों को राज्य सरकार में भी अच्छी-खासी हिस्सेदारी दी है। यहां के नौ नेता राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

विधान परिषद चुनावों से पहले भाजपा ने अपने बड़े नेताओं को प्रचार में उतारा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 अक्टूबर को भाजपा के चुनाव प्रचार के तहत शिक्षकों और स्नातकों की एक सभा को संबोधित किया था।

इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने सपा को ‘शिक्षा विरोधी’ बताया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सपा की पिछली सरकारों में सरकारी नौकरियों की भर्ती में भ्रष्टाचार हुआ। उन्होंने मतदाताओं से अखिलेश यादव की पार्टी पर भरोसा नहीं करने की अपील की थी।

उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने भी एक सभा में कहा था कि 2020 में भाजपा दोनों सीटें अति आत्मविश्वास के कारण हार गई थी।

इस बार संभावित हार के कारणों पर भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “इस बार भी अति आत्मविश्वास और लापरवाही हावी रही। डाले गए वोटों का जिलेवार विश्लेषण किया जाएगा।”

भाजपा के एक अन्य नेता ने कहा कि सपा के कार्यकर्ताओं ने अपने समर्थकों के नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं के मुकाबले ज्यादा सक्रियता दिखाई। उन्होंने कहा, “उम्मीदवारों और पार्टी संगठन ने मतदाताओं तक पहुंचने के बजाय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता के भरोसे चुनाव छोड़ दिया।”उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव के नतीजों पर समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता आशुतोष वर्मा ने कहा कि ‘अयोध्या तो सिर्फ झांकी थी, मथुरा-काशी बाकी थी।’ उन्होंने कहा कि लखनऊ भी अब मैदान में उतर आया है।

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