यूपी के अयोध्या स्थित रामलला का भोग प्रसाद शुद्धता और खाद्य सुरक्षा के मानकों पर खरा उतरा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की जांच में राम मंदिर की रसोई के सभी नमूने मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। अब एफएसएसएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रजित पुन्हानी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भोग प्रमाणपत्र सौंपेंगे।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के सूत्रों के मुताबिक, सीईओ शनिवार को अयोध्या पहुंच सकते हैं। रामजन्मभूमि परिसर स्थित सीता रसोई में रामलला के लिए प्रतिदिन भोग तैयार किया जाता है। एक शिफ्ट में आठ कर्मचारी इसकी व्यवस्था संभालते हैं। इनमें दो भंडारी, दो कोठारी और दो सेवक सहित अन्य कर्मचारी शामिल हैं। विशेष अवसरों पर रामलला को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। एकादशी और कुछ खास तिथियों पर फलाहार की व्यवस्था रहती है। प्रतिदिन फल और जूस भी अर्पित किए जाते हैं। भोग लगाने के बाद प्रसाद ट्रस्ट के कर्मचारियों, पुजारियों और श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।
एफएसएसएआई धार्मिक स्थलों पर भोग और प्रसाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भोग प्रमाणन प्रक्रिया अपनाता है। इसमें कच्चे माल, पानी, घी-तेल, बर्तनों की सफाई, रसोई की स्वच्छता और भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों के स्वास्थ्य संबंधी मानकों की जांच की जाती है। करीब दो महीने पहले राम मंदिर की रसोई के भंडार गृह से नमूने लिए गए थे। प्रयोगशाला जांच में सभी नमूने मानकों पर खरे उतरे। प्रमाणपत्र मिलने के बाद राम मंदिर भी उन प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हो जाएगा, जहां का भोग या प्रसाद एफएसएसएआई से प्रमाणित है। तिरुपति बालाजी, वैष्णो देवी और जगन्नाथ पुरी जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को भी यह प्रमाणन मिल चुका है।
उधर, राम मंदिर में ट्रस्ट में हुए बदलाव के साथ नये-नये बदलाव सामने आ रहे हैं। ऐसे में रामलला के श्रृंगार की व्यवस्था भी बदल गयी है। हालांकि यह व्यवस्था अनायास नहीं बदली, बल्कि इसके पीछे उचित कारण था। फिलहाल रामलला के श्रृंगार के लिए जो पुष्पाहार और कंठाहार पहले बंगलुरु और मुंबई से आता था, वह अब दिल्ली से मंगाया जा रहा है। यह व्यवस्था ट्रस्ट के द्वारा नहीं है फिर भी ट्रस्ट की सहमति से हुई है।
जानकारी के मुताबिक बर्फ के बड़े डिब्बे में पैक कराकर अलग-अलग प्रकार सुगंधित पुष्प की मालाएं यहां यात्री बस के माध्यम से प्रत्येक सुबह भेजी जाती है जो शाम को यहां पहुंचती है और फिर अगले दिन उन्हीं से भगवान का श्रृंगार किया जाता है और सुबह छह बजे के नियत समय पर श्रृंगार आरती की जाती है, जिसका सजीव प्रसारण भी दूरदर्शन के माध्यम से पूरे देश में होता है।