NEET UG MBBS Admission : नीट में 340 अंक लाने वाली इस लड़की को मिले MBBS में दाखिला, सुप्रीम कोर्ट का सरकार को आदेश

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NEET UG : सुप्रीम कोर्ट ने गोवा सरकार को निर्देश दिया कि वह इंटरनेशनल लेवल पर पहचान बना चुकी स्पोर्ट्स सेलर पर्ल मिलिंद कोलवाकार को खेल कोटा के तहत एमबीबीएस सीट पर दाखिले दे। पर्ल कोलवाकार ने इस वर्ष नीट यूजी 2025 की परीक्षा पास की थी। शीर्ष अदालत के आदेश से पहले बॉम्बे हाई कोर्ट (गोवा बेंच) ने गोवा सरकार की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया था जिसके तहत मेडिसिन और डेंटिस्ट्री में एडमिशन के लिए स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों के लिए आरक्षित दो खाली सीटों को एडमिशन प्रक्रिया के बीच में ही स्पोर्ट्स कोटे में बदल दिया गया था। हाईकोर्ट ने सरकार की अधिसूचना को मनमाना और गलत बताया था। कोवालकर ने हाईकोर्ट के अगस्त 2025 में दिए फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक अपने फैसले में देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा, ‘हम हाईकोर्ट की ओर से पास किए गए आदेश में दखल नहीं देना चाहते। हालांकि केस के तथ्यों और हालात को देखते हुए और पूरा इंसाफ करने के लिए हम निर्देश देते हैं कि 1 अगस्त, 2025 के विज्ञापन के मद्देनजर स्पोर्ट्स कोटे के तहत एक सीट को उस एक सीट में से एडजस्ट किया जाए जो खाली रह गई। यह निर्देश केस के खास तथ्यों और हालात को देखते हुए है और इसे मिसाल नहीं माना जाएगा।’

कोलवालकर ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्होंने सेलिंग के खेल में कई बार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में गोवा और भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार ने भी नवाजा जा चुका है। उसने अदालत में बताया कि उसका नीट यूजी स्कोर 720 में से 340 था और वह स्पोर्ट्स कोटे के तहत एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन लेना चाहती थी।

हाईकोर्ट ने क्यों रद्द की थी गोवा सरकार की अधिसूचना

रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में हाईकोर्ट ने गोवा सरकार के नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया था क्योंकि यह एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने के बाद जारी किया गया था। हाईकोर्ट ने माना कि टेक्निकल एजुकेशन डायरेक्टोरेट की ओर से 1 अगस्त को जारी नोटिफिकेशन मनमाना था। इस नोटिफिकेशन में मेडिकल दाखिला प्रक्रिया के बीच में स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों के कोटे की खाली पड़ी सीटों को भरने के लिए काबिल खिलाड़ियों से आवेदन मांगे गए थे।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सरकार ने प्रॉस्पेक्टस में बदलाव किए बिना या प्रॉस्पेक्टस में इस बदलाव को नोटिफाई किए बिना सीधे स्पोर्ट्स कोटे के लोगों से आवेदन मांगे क्योंकि सीएफएफ कैटेगरी की सीटें खाली थीं। कोर्ट ने आगे कहा कि यह प्रॉस्पेक्टस में दिए गए नियमों पर यूटर्न लेने जैसा है। प्रोस्पेक्टस के निर्देश बाध्य हैं। इसमें कहा गया था कि खाली होने वाली कोई भी सीट अनारक्षित कर दी जाएगी और जनरल कैटेगरी से भरी जाएगी।

क्या है नीट परीक्षा

नीट के जरिए ही देश के तमाम मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमस, बीएचएमस, बीयूएमस ( MBBS, BDS, BSMS, BAMS, BHMS, BUMS ) और अन्य विभिन्न अंडर ग्रेजुएट मेडिकल कोर्सेज में दाखिला होता है। इसके अलावा मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (एमएनएस) के लिए भी अभ्यर्थी नीट यूजी परीक्षा के मार्क्स के जरिए आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विस हॉस्पिटल के बीएससी नर्सिंग कोर्स में एडमिशन लेते हैं।

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