डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस का क्या हाल, कौन से देश जुड़ने को तैयार और किनका इनकार

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में पुनर्निर्माण के कामों के लिए बोर्ड ऑफ पीस के गठन का ऐलान किया है। इसके तहत वह दुनिया के तमाम देशों को साथ ला रहे हैं और उनका कहना है कि इसके जरिए गाजा का विकास होगा। इस बोर्ड में उन्होंने अपने दामाद जेरेड कुशनर, मिडल ईस्ट में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ को रखा है। इसके अलावा खुद को चेयरमैन बनाने का फैसला लिया है। यही नहीं डोनाल्ड ट्रंप का तो कहना है कि बोर्ड ऑफ पीस आने वाले समय में संयुक्त राष्ट्र संघ की जगह ले लेगा। उनका कहना था कि संयुक्त राष्ट्र काम की संस्था नहीं है और वह दुनिया में चल रहे झगड़ों को रोकने में सफल नहीं रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप के इस प्रस्ताव को लेकर यूरोप के कई देशों को आपत्ति भी रही है। फ्रांस ने तो इस पर खुलकर नाराजगी जाहिर की थी। डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि उनकी ओर से प्रस्तावित यह संस्था दुनिया भर में चल रहे विवादों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका अदा करेगी। इससे जुड़ने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ने 50 देशों को आमंत्रित किया है, जिनमें से 30 देश शामिल हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि अमेरिका के बोर्ड ऑफ पीस से जुड़ने से किन देशों ने इनकार कर दिया और कौन से देश इसमें एंट्री के लिए तैयार हैं। बता दें कि इस संस्था से अमेरिका के करीबी देश जर्मनी, यूक्रेन और ब्रिटेन तक ने शामिल होने से इनकार कर दिया है।

अर्जेंटीना

– आर्मेनिया

– अज़रबैजान

बहरीन

– बेलारूस

– मिस्र

हंगरी

– इंडोनेशिया

– जॉर्डन

– कजाकिस्तान

– कोसोवो

– मोरक्को

– पाकिस्तान

– कतर

– सऊदी अरब

– तुर्की

– संयुक्त अरब अमीरात

– उज़्बेकिस्तान

– वियतना

 फ्रांस

– नॉर्वे

– स्लोवेनिया

– स्वीडन

 ब्रिटेन

– कंबोडिया

– चीन

– क्रोएशिया

– जर्मनी

– इटली

– यूरोपीय संघ की कार्यकारी शाखा

– पैराग्वे

– रूस

– सिंगापुर

– यूक्रेन

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