UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, कहा- इसका दुरुपयोग हो सकता है

Breaking India News Politics

Supreme Court order on New UGC Rules: सुप्रीम कोर्ट आज उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाली नियमावली, 2026 पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। 2012 के पुराने नियम ही फिलहाल लागू रहेंगे। आपको बता दें कि यूजीसी के इन नए नियमों पर आरोप लगाया गया था कि ये सामान्य श्रेणी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ इन रिट याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिका में दावा है कि नए नियमों से भेदभाव बढ़ेगा। कोर्ट ने भी इस बात से सहमति जताई है।

सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, ‘क्या हम उल्दी दिशा में जा रहे हैं? हमें जातिविहीन समाज की तरफ बढ़ना चाहिए। जिन्हें सुरक्षा चाहिए उनके लिए उचित व्यवस्था हो।’

पीठ ने कहा, ‘इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इसका दुरुपयोग हो सकता है। हमें उस स्थिति में नहीं जाना चाहिए जहां स्कूलों को अलग-अलग कर दिया जाए, जैसे कि अमेरिका में होता है। वहां श्वेतों के लिए अलग स्कूल की व्यवस्था होती है। भारत में शिक्षण संस्थानों को एकता दिखानी चाहिए।’ कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए कहा है। 19 मार्च को इस मामले पर अगली सुनवाई होगी।

CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अब विधायिका ने भी यह महसूस कर लिया है कि आरक्षित समुदायों के भीतर भी ऐसे लोग हैं जो सक्षम हो चुके हैं। उन्होंने कहा, “आरक्षित वर्गों में भी कुछ समुदाय दूसरों की तुलना में बेहतर सुविधाओं का आनंद ले रहे हैं। यह नीति निर्माताओं की बुद्धिमत्ता है कि वे इसे कैसे देखते हैं।”

सुनवाई के दौरान CJI ने कहा, “मान लीजिए अनुसूचित जाति (SC) के ‘A’ समूह से संबंधित कोई छात्र किसी अन्य समुदाय के छात्र के खिलाफ अपमानजनक भाषा का उपयोग करता है तो क्या इसका कोई उपाय है?” उनका इशारा इस ओर था कि क्या नियम केवल एक तरफा संरक्षण दे रहे हैं या वे वास्तव में एक न्यायपूर्ण वातावरण बना रहे हैं।

कोर्ट ने परिसरों में छात्रों को जाति के आधार पर बांटने की किसी भी कोशिश को खतरनाक बताया। CJI ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आप अलग हॉस्टल बनाने की बात कर रहे हैं। ऐसा बिल्कुल मत कीजिए। जाति विहीन समाज की दिशा में हमने जो कुछ भी हासिल किया है। क्या हम अब उससे पीछे की ओर जा रहे हैं?” उन्होंने रैगिंग को सबसे खराब बताते हुए कहा कि यह संस्थानों के माहौल को जहरीला बना रही है।

आपको बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा वर्ष 2026 में लागू किए गए इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा में समानता सुनिश्चित करना है, लेकिन याचिकाकर्ताओं का तर्क इसके बिल्कुल विपरीत है। अधिवक्ता मृत्युंजय तिवारी, विनीत जिंदल और राहुल दीवान द्वारा दायर इन याचिकाओं में कई आपत्तियां उठाई गई हैं।

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ये नियम समानता के नाम पर सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के हितों को नुकसान पहुंचाएंगे। दलील दी गई है कि नए नियम योग्यता और समानता के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं। याचिकाओं में कहा गया है कि नियमावली का वर्तमान स्वरूप समावेशी होने के बजाय एक वर्ग विशेष के प्रति झुकाव रखता है, जिससे सामान्य वर्ग के अवसर सीमित हो सकते हैं।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *