योगी सरकार छात्रों को तनाव मुक्त शिक्षा व अवसाद से बचाने के लिए नई नीति बनाएगी। मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति के तहत छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाएगा। विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र खोले जाएंगे। हर विभाग में नोडल अफसर तैनात किए जाएंगे। छात्रों के लिए वर्कशॉप व ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चलाए जाएंगे।
मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित मामलों के आंकड़ों को एकत्र किया जाएगा। कितने छात्रों में यह समस्या देखी गई, जांच के बाद अवसाद में होने की कितने छात्रों में पुष्टि हुई। ऐसे छात्रों के लिए कितने काउंसिलिंग सत्र आयोजित किए गए। जरूरत के अनुसार बाहर से मानसिक स्वास्थ्य प्रोफेशनल की सेवा ली गई। फैकल्टी मेंटर की ओर से कितने काउंसिलिंग सत्र आयोजित कराए गए। प्रत्येक संस्थान ऐसे छात्रों का डाटा तैयार करेगा। बचाव के लिए क्या उपाय किए गए और कितने छात्रों को राहत मिली इसकी जानकारी देनी होगी।
मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण कमेटी का गठन किया जाएगा। जिसमें डीन स्टूडेंट वेलफेयर, फैकल्टी प्रतिनिधि, हॉस्टल वार्डेन, कर्मचारी प्रतिनिधि व छात्र प्रतिनिधि भी होंगे। यही नहीं छात्रों के परिवार व पूर्व छात्रों को भी इस कमेटी में शामिल किया जाएगा। मानसिक तनाव व अवसाद से छात्रों को बचाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी जानकारी लेगी।
संस्थानों में स्थापित किए जाने वाले मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र में साइक्लोजिस्ट, क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट व साइक्रेट्रिक सोशल वर्कर के साथ-साथ सहयोगी स्टॉफ होगा। यह जिला स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य प्रोग्राम, मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल व क्लीनिक से जुड़े रहेंगे। उपचार के लिए आयुष्मान भारत योजना की सुविधाएं भी छात्रों को दी जाएंगी।

