अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत में रसोई गैस की कीमतों पर भी साफ दिखने लगा है। मिडिल ईस्ट में सप्लाई प्रभावित होने से दुनियाभर में ईंधन और एलपीजी की कीमतों में तेजी आई है। इसी के चलते भारत में भी एलपीजी सिलेंडर महंगा हो गया है। तेल कंपनियों ने घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर भी असर पड़ रहा है।
सरकारी तेल कंपनियों ने 7 मार्च से घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की है। इसके बाद दिल्ली में 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर अब 913 रुपये का हो गया है। वहीं कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 114.5 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। कमर्शियल गैस सिलेंडर का इस्तेमाल आमतौर पर होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट में होता है, इसलिए इस बढ़ोतरी का सीधा असर हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर पड़ रहा है।
देश के अलग-अलग शहरों में एलपीजी की नई कीमतें इस प्रकार से हैं- मुंबई में घरेलू सिलेंडर की कीमत 912.50 रुपये हो गई है, जबकि कोलकाता में यह 939 रुपये तक पहुंच गई है। चेन्नई में अब एक सिलेंडर के लिए 928.50 रुपये देने होंगे। वहीं गुरुग्राम में करीब 921.50 रुपये, नोएडा में 910.50 रुपये और बेंगलुरु में 915.50 रुपये प्रति सिलेंडर की कीमत हो गई है। हैदराबाद में घरेलू एलपीजी सिलेंडर करीब 965 रुपये में मिल रहा है।
एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में चल रहा संकट माना जा रहा है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इनमें से लगभग 85 से 90 प्रतिशत सप्लाई स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ के रास्ते आती है। इस समुद्री मार्ग पर मौजूदा तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।
इस बीच महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई शहरों से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी की खबरें भी सामने आई हैं। होटल और रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि अचानक सप्लाई कम होने से उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि सरकारी अधिकारियों का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी का असर आम परिवारों पर बहुत ज्यादा नहीं पड़ेगा। उनके मुताबिक औसतन एक परिवार साल में 4 से 5 सिलेंडर इस्तेमाल करता है, ऐसे में 60 रुपये की बढ़ोतरी का मतलब लगभग 80 पैसे प्रतिदिन का अतिरिक्त खर्च है। यानी एक व्यक्ति पर रोजाना करीब 20 पैसे का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सरकार का दावा है कि इसके बावजूद भारत में एलपीजी की कीमतें कई अन्य देशों के मुकाबले अभी भी कम हैं।

