पश्चिम एशिया में जारी ईरान संघर्ष का असर अब भारतीय विमानन क्षेत्र पर गहराई से दिखने लगा है। देश की प्रमुख एयरलाइन कंपनी ‘एयर इंडिया’ ने पिछले तीन हफ्तों में इस क्षेत्र के लिए अपनी लगभग 2,500 उड़ानें रद्द कर दी हैं। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कैंपबेल विल्सन ने कर्मचारियों को भेजे एक आंतरिक संदेश में बताया कि एयरलाइन वर्तमान में इस क्षेत्र में अपने सामान्य शेड्यूल का केवल 30% ही संचालित कर पा रही है।
कैंपबेल विल्सन ने अपने नोट में स्वीकार किया कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का एयर इंडिया समूह पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा, “संघर्ष शुरू होने के बाद से हमें क्षेत्र की लगभग 2,500 उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। आज की स्थिति यह है कि हवाई अड्डों और हवाई क्षेत्र के बंद होने या सुरक्षा मानकों के दायरे से बाहर होने के कारण हम अपनी सामान्य क्षमता का केवल एक-तिहाई हिस्सा ही चला पा रहे हैं।”
विल्सन ने आगाह किया कि इस संकट का वित्तीय प्रभाव अब महसूस होने लगा है। विमान ईंधन की कीमतें दोगुनी से अधिक हो गई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका असली असर अगले महीने से कंपनी के खातों पर दिखेगा। बढ़ते खर्चों की भरपाई के लिए एयरलाइन ने नए टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज लगाना शुरू कर दिया है।
ब्रिटेन, यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली उड़ानों को सुरक्षित रखने के लिए लंबे रास्तों से भेजा जा रहा है, जिससे ईंधन की खपत और यात्रा का समय दोनों बढ़ गए हैं।
CEO ने आर्थिक अनिश्चितता के बीच हवाई यात्रा की मांग में कमी आने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “हर ग्राहक बढ़ा हुआ किराया देने को तैयार नहीं होता। मांग गिरने से पहले हम कीमतों को एक सीमा तक ही बढ़ा सकते हैं।” हालांकि, उन्होंने यह भी नोट किया कि यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे कुछ बाजारों में नई मांग देखी जा रही है, जहां कंपनी अतिरिक्त उड़ानें तैनात कर रही है।
विल्सन ने विशेष रूप से उन कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया जो सीधे तौर पर प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। उन्होंने कहा कि एयर इंडिया का नेटवर्क और शेड्यूल फिलहाल काफी अस्थिर है, लेकिन टीम की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। उन्होंने कर्मचारियों से गैर-जरूरी खर्चों पर कड़ा नियंत्रण रखने और सुरक्षित संचालन पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया।

