सस्ते हो गए बासमती चावल, मखाना और मसाले, ईरान Vs इजराइल युद्ध का ये भी असर

Breaking India News

ईरान और अमेरिका-इसराइल युद्ध की आंच से जहां पूरी दुनिया झुलसती नजर आ रही है। दुनिया के तमाम देश ऊर्जा संकट के एक नए दौर में पहुंचते दिख रहे हैं। प्लास्टिक, पेट्रोलियम से लेकर रोजमर्रा की जरूरत की तमाम चीजें महंगी हो रही हैं, वहीं अरब देशों को निर्यात होने वाली कुछ वस्तुओं के दामों में गिरावट भी दिख रही है। मसलन, मखाना जहां 100 रुपये किलो तक सस्ता हो गया है, वहीं बासमती चावल और चीनी में भी गिरावट दिख रही है। वहीं काली मिर्च, बड़ी इलायची से लेकर सफेद इलायची की कीमतों में भी गिरावट दिख रही है।

मखाना 15 दिन पहले तक थोक में 800 से लेकर 1200 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा था। लेकिन सोमवार को यह 700 से लेकर 1100 रुपये प्रति किलो तक बिका। इसी तरह छोटी इलायची जो 2500 से 3450 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, उसकी कीमत में 100 से 125 रुपये तक की गिरावट दिख रही है। इसी क्रम में बड़ी इलायची 1700 से लेकर 2250 रुपये प्रति किलो तक बिक रही थी। इसकी कीमतों में भी 100 से 110 रुपये की गिरावट दिख रही है। थोक कारोबारी अनिल जायसवाल का कहना है कि गर्मी में वैवाहिक शुभ मुहूर्त 15 अप्रैल से शुरू होंगे। ऐसे में मसालों की कीमत में तेजी रहती है। लेकिन खाड़ी देशों को निर्यात होने वाले मसाले और ड्राई फ्रूट में नरमी दिख रही है। युद्ध लंबा खिंचा तो कीमतों में और गिरावट दिख सकती है। इसी तरह ड्राईफ्रूट में भी नरमी दिख रही है। खाड़ी देशों को अंगूर बड़ी मात्रा में निर्यात होता है। निर्यात प्रभावित होने का असर किशमिश पर दिख रहा है।

गोरखपुर किराना कमेटी के अध्यक्ष गोपाल जाययवाल का कहना है कि 500 से लेकर 520 रुपये बिकने वाला किशमिश 400 से लेकर 410 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। वहीं बिहार से निर्यात होने वाले मखाने में भी गिरावट दिख रही है। नवरात्र के बाद भी मखाना की कीमतों में 100 से 110 रुपये प्रति किलो की गिरावट दिख रही है। सोमवार को साहबगंज थोक मंडी में मखाना 700 से लेकर 1150 रुपये प्रति किलो तक बिका।

खाड़ी देशों को बड़ी मात्रा में बासमती चावल और चीनी भी निर्यात होता है। निर्यात प्रभावित होने का असर चावल और चीनी की कीमतों पर दिख रही है। सोमवार को चीनी 4300 से 4320 और सल्फर लेस 4380 से लेकर 4400 रुपये बिक रहा है। पिछले 15 दिन में कीमतों में 40 से 50 रुपये की नरमी दिख रही है। चीनी के थोक कारोबारी मदन अग्रहरि का कहना है कि निर्यात प्रभावित होने से देश में अधिक चीनी का स्टॉक बच रहा है। चीनी मिलों की तरफ से नरमी का संकेत आगे भी मिल रहा है। चैंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष संजय सिंधानिया का कहना है कि खाड़ी देशों को बासमती सेला चावल का निर्यात होता है। पिछले 15 दिनों में प्रति किलो 8 से 10 रुपये की मंदी है। युद्ध लंबा खिंचा तो मार्केट में और नरमी दिखेगी।

 

 

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *