फिलिस्तीनियों को सीधे मौत की सजा, सिर्फ 90 दिन में फैसला; इजरायल में कानून पारित

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ईरान युद्ध के बीच इजरायल की संसद ने एक नए कानून को मंजूरी दी है जिसके तहत आतंकी घटनाओं के आरोपी फिलिस्तीनियों को मौत की सजा दी जाएगी। सजा का ऐलान होने के 90 दिनों के अंदर ही दोषी को फांसी दी जाएगी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत 62 सांसदों ने इस कानून के समर्थन में वोटि किया है। इजरायली प्रशासन का कहना है कि वेस्ट बैंक में जानलेवा हमला करने वाले फिलिस्तीनियों को अब सीधे मौत की सजा दी जाएगी। इस विधेयक का पारित होना इजराइल के धुर दक्षिणपंथी दलों के लिए बड़ी जीत है, जिन्होंने इसके लिए जोरदार प्रयास किए थे। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सदन में विधेयक के पक्ष में मतदान किया।

इस कानून के तहत इजराइल के लोगों की हत्याओं के लिए दोषी ठहराए जाने वाले वेस्ट बैंक के फलस्तीनियों के लिए मौत की सजा तय की गई है। यह कानून इजराइल की अदालतों को अपने नागरिकों को मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा देने का अधिकार भी देता है। यह कानून पहले के मामलों पर लागू नहीं होगा बल्कि केवल भविष्य के मामलों पर लागू होगा।

इस विधेयक के मुताबिक कुछ खास मामलों में आरोपियों को उम्र कैद की सजा भी दी जा सकती है। वेस्ट बैंक में हमलों के आरोपियों पर मुकदमा मिलिट्री कोर्ट में चलाया जाएगा। इजरायल को इस कानून को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

यूरोपीय परिषद ने इस कानून को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि अलग-अलग लोगों के लिए एक ही जुर्म की सजा अलग नहीं हो सकती। वहीं अमेरिका ने इजरायल के इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि एक संप्रभु राष्ट्र के तौर पर इजरायल के पास आतंकियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा निर्धारित करने का अधिकार है। अमरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने क हा, हमें विश्वास है कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए इजरायल हर मामले की कोर्ट में ठीक से सुनवाई करके ही सजा तय करेगा।

इजरायल के यह नया कानून कहता है कि अगर कोई भी व्यक्ति जान बूझकर किसी इजरायली नागरिक की हत्या या नुकसान पहुंचाने का प्रयास करेगा तो उसे मौत की सजा या फिर उम्रकैद की सजा दी जाएगी। मौत की सजा का मतलब फांसी पर लटकाने से है। इन क्रिमिनल कोर्ट में इजरायलियों, फिलिस्तीनियों या फिर पूर्वी येरुशलम में रहने वाले लोगों से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी। नए कानून के मुताबिक सजा का ऐलान होने के 90 दिनों के अंदर ही दोषी को फांसी दी जाएगी। कुछ खास परिस्थितियों में इसे बढ़ाकर 180 दिनों तक किया जा सकता है।

 

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