संसदीय इतिहास में पहली बार! मनोनीत सांसद हरिवंश निर्विरोध बने राज्यसभा के उपसभापति

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वरिष्ठ पत्रकार से राजनेता बने हरिवंश नारायण सिंह ने आज एक नया इतिहास रच दिया है। उच्च सदन (राज्यसभा) के उपसभापति पद के लिए उन्हें लगातार तीसरी बार निर्विरोध चुन लिया गया है। विपक्षी खेमे द्वारा इस पद के लिए कोई उम्मीदवार न उतारे जाने के कारण उनका निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया था, जिसकी आज सुबह 11 बजे औपचारिक घोषणा कर दी गई। भारत के संसदीय इतिहास में पहली बार है जब कोई मनोनीत सांसद राज्यसभा के उपसभापति के लिए चुना गया है।

राज्यसभा के उपसभापति चुनाव के लिए नामांकन की समय-सीमा 16 अप्रैल (गुरुवार) को दोपहर 12 बजे समाप्त हो गई थी। इस पद के लिए केवल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ओर से ही हरिवंश के नाम के प्रस्ताव आए।

राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने हरिवंश के नाम का पहला प्रस्ताव पेश किया, जिसका समर्थन सांसद एस. फांगनोन कोन्याक ने किया। कुल मिलाकर उनके समर्थन में राज्यसभा सचिवालय को 5 प्रस्ताव मिले, जिनमें भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के प्रस्ताव शामिल थे।

विपक्षी दलों ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा और चुनाव का बहिष्कार कर दिया, जिससे चुनाव प्रक्रिया बिना किसी मुकाबले के पूरी हुई। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद लंबे समय से खाली होने का मुद्दा उठाते हुए राज्यसभा उपसभापति के चुनाव की जल्दबाजी पर आपत्ति तो जताई, लेकिन उन्होंने अपना कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा

हरिवंश नारायण सिंह का पिछला कार्यकाल (जो जनता दल यूनाइटेड के कोटे से था) 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गया था। इस बार उनके राज्यसभा पहुंचने और उपसभापति बनने की राह पहले से अलग रही।

हरिवंश नारायण सिंह का पिछला कार्यकाल (जो जनता दल यूनाइटेड के कोटे से था) 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गया था। इस बार उनके राज्यसभा पहुंचने और उपसभापति बनने की राह पहले से अलग रही।

देश के संसदीय इतिहास में हरिवंश ऐसे पहले मनोनीत सदस्य बन गए हैं, जो राज्यसभा के उपसभापति जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

राज्यसभा में हरिवंश नारायण सिंह के निर्विरोध उपसभापति चुने जाने पर बोलते हुए PM नरेंद्र मोदी ने कहा- लगातार तीसरी बार उपसभापति चुने जाना इस बात का प्रमाण है कि इस सदन का आप पर कितना गहरा भरोसा है। बीते समय में सदन को आपके अनुभव से कितना लाभ मिला है और आप सबको साथ लेकर चलने के लिए कितने प्रयास करते हैं… हम सबने देखा है कि हरिवंश जी के नेतृत्व में सदन की ताकत और भी ज्यादा असरदार हुई है। वे न सिर्फ सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं, बल्कि अपने पिछले अनुभवों का इस्तेमाल करके सदन को बड़ी बारीकी से समृद्ध भी करते हैं… मुझे पूरा भरोसा है कि उपसभापति के तौर पर उनका यह नया कार्यकाल भी उसी भावना, संतुलन और समर्पण के साथ आगे बढ़ेगा। हम सबके प्रयासों से सदन की गरिमा नई ऊंचाइयों को छुएगी।

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के मीडिया सलाहकार रह चुके हरिवंश नारायण सिंह मुख्य रूप से पत्रकारिता जगत से राजनीति में आए हैं। सदन में अपने संयम और उत्कृष्ट संचालन के लिए उन्हें सभी दलों में सम्मान प्राप्त है। उपसभापति के रूप में यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल है।

विपक्षी दलों (खासकर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन) ने चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला लिया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह विरोध हरिवंश जी के प्रति नहीं, बल्कि सरकार की संसदीय परंपराओं की अनदेखी के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले सात साल से लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद खाली पड़ा है, जो संसदीय परंपरा का अपमान है। इसके अलावा, हरिवंश का मनोनयन उनके कार्यकाल खत्म होने के ठीक एक दिन बाद किया गया, जो पहले कभी नहीं हुआ। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने इस मामले में उनसे कोई सार्थक परामर्श नहीं किया। जयराम रमेश ने उम्मीद जताई कि “हरिवंश 3.0” विपक्ष की मांगों के प्रति अधिक संवेदनशील और उदार रहेंगे।

इस बार राज्यसभा सदस्य के रूप में वापसी और उपसभापति पद पर हैट्रिक लगाने के बाद, संसदीय राजनीति में हरिवंश का कद और भी मजबूत हो गया है। सदन के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें उनके इस नए और ऐतिहासिक कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

 

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