अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले को लेकर श्रीराम जन्मभूमि क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक आज होने जा रही है। इस बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर चर्चा के साथ फैसला होगा। अगर इस्तीफे कबूल किए गए तो बैठक में इनकी जगह नए विकल्पों पर भी चर्चा के आसार हैं। इनमें सबसे ज्यादा दो नामों बजरंग बांगड़ा और नीरज दौनेरिया पर चर्चा हो रही है। बजरंग बांगड़ा इस समय विहिप के महामंत्री हैं और नीरज दौनेरिया बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। एक नाम कृष्णमोहन का भी चर्चा में है।
सूत्रों के मुताबिक महासचिव चंपतराय के विकल्प के तौर पर विहिप महामंत्री बजरंगलाल बांगड़ा पहली पसंद हो सकते हैं। बजरंग लाल बागड़ा विहिप के केंद्रीय और अंतरराष्ट्रीय महामंत्री होने के साथ ही पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। बागड़ा नालको चेयरमैन भी रहे हैं। उन्हें फरवरी 2024 में अयोध्या में ही हुई विहिप की प्रन्यासी मंडल और प्रबंध समिति की बैठक में चुना गया था। इसके पहले वे उड़ीसा में नालको चेयरमैन रहे। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद वह विहिप के राष्ट्रीय मंत्री बने।
चंपत राय की जगह ट्रस्ट में कृष्णमोहन को भी महासचिव पद पर मौका मिल सकता है। कृष्णमोहन भारतीय वन सेवा से सेवानिवृत्त अफसर हैं। वर्तमान में वह आरएसएस के पूर्वी यूपी के संघ चालक हैं।
रविवार दिन भर विकल्पों के नामों पर सरगर्मी चलती रही। एक धड़ा चंपत राय के पक्ष में मुखर है तो दूसरा मान रहा है कि ट्रस्ट में बजरंग दल राष्ट्रीय संयोजक नीरज दौनेरिया की जगह भी बन सकती है। सदस्य रहे दिवंगत बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के स्थान पर नए सदस्य का मनोनयन भी संभव है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को प्रस्तावित बैठक को लेकर अय़ोध्या का माहौल गर्म है। सबकी नजरें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे पर हैं। इसे लेकर दो तरह की विचारधाराएं हैं। ट्रस्ट एक तरह से दो धड़ों में बंटा हुआ है। एक धड़ा चाहता है कि दोनों के इस्तीफे स्वीकार न किए जाएं। दोनों निर्दोष हैं और ट्रस्ट में बने रहने का दबाव बना रहा है।
दूसरे धड़े का मानना है कि चंपत राय की भूमिका भले ही सीधी नहीं रही लेकिन जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। जब लोग शिकायत कर रहे थे तो क्यों नजरंदाज किया गया। जिम्मेदारी तो ट्रस्ट के सभी सदस्यों की थी लेकिन उन्हें ऐसी जानकारी थी तो तत्काल सख्त कदम नहीं उठाए गए। इन विरोधाभासी विचारों के बीच दोनों धड़े चंपत राय को निर्दोष भी बताते हैं। इनकी दलीलें हैं कि चंपत राय इस तरह का कृत्य नहीं कर सकते, लेकिन जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
चंपत राय और अनिल मिश्रा के सामान्य व्यवहार को लेकर भी एक धड़ा सवाल उठाता है। इनकी दलील है कि दोनों किसी की बात नहीं सुनते थे। मंदिर स्टॉफ पर जरूरत से ज्यादा भरोसे ने ही उन्हें मुश्किल में डाल दिया। ट्रस्ट के एक सदस्य का कहना है कि चंपत राय ने महासचिव पद से इस्तीफा दिया मगर ट्रस्ट के सदस्य तो अभी हैं ही। इनकी दलील है कि चंपत राय ऐसा नहीं कर सकते। उनकी टीम ने ही यहां भव्य मंदिर निर्माण कराया। आंदोलन के वक्त के साथी रहे हैं, उनके व्यवहार से सभी वाकिफ हैं।
दूसरी विचारधारा यह है कि चंपत राय जिम्मेदारी से कैसे बच सकते हैं। ट्रस्ट के अलावा संत समाज में भी चंपत के प्रशंसक और विरोधी हैं। सबके अपने विचार और दलीलें हैं। दो तरह के विचारों के बीच सोमवार को होने वाली बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्र के भविष्य पर फैसला होगा। ट्रस्ट का अंकगणित देखा जाए तो ज्यादातर दोनों के पक्ष में हैं।
वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट के वयोवृद्ध न्यासी स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने रविवार को कहा कि अपराध किसी का हो, क्षम्य नहीं है। जिम्मेदारी तो सभी की है। हम निष्पक्ष व्यवस्था के पक्ष में हैं। ऐसी घटना निंदनीय है। राममंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन की नहीं बल्कि व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। ट्रस्ट कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेने स्वामी वासुदेवानंद यहां पहुंच गए हैं। उन्होंने राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना को लेकर कहा कि उन्हें समाचार पत्रों से जानकारी मिली है। यह बहुत निंदनीय घटना है।
उन्होंने कहा कि इन दिनों वह देवघर (झारखंड) में थे । उन्हें मोबाइल पर बैठक की सूचना मिली है। उन्होंने यह विश्वास भी जताया कि चंपतराय चोरी नहीं कर सकते। मैं उन्हें राम मंदिर आंदोलन के समय से जानता हूं। कहा उन्होंने महासचिव पद से इस्तीफा दिया है, सदस्य तो वो हैं ही। डा. अनिल मिश्र के बारे में कहा कि वह भी संघ के पुराने कार्यकर्ता हैं।
उन्होंने कहा कि मुझे इन दोनों के द्वारा त्यागपत्र दिए जाने की जानकारी मिली है। फिर भी बैठक में उनका पक्ष सुना जाएगा और फिर सभी सदस्य जो भी निर्णय लेंगे तदनुसार आगे कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी बताया कि बैठक में क्या होगा और क्या नहीं, इस पर पहले से कुछ कहना संभव नहीं है। यह पूछने पर कि 15 सदस्यीय कार्यकारिणी में दिवंगत अयोध्या नरेश विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र का पद रिक्त है इसलिए 14 सदस्य शेष हैं यदि दोनों का इस्तीफा मंजूर हो गया तो तीन नये सदस्य कौन चुने जा सकते हैं।
इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ट्रस्ट महासचिव ने अपने पद से इस्तीफा दिया है, वह ट्रस्टी बने रहेंगे। ट्रस्ट के बायलाज के बारे में जानकारी मांगने पर उन्होंने कहा कि इसे ट्रस्टी केशव परशरण ने अंग्रेजी में बनाया है और हिंदी-संस्कृत भाषा जानते हैं लेकिन अंग्रेजी विषय का ज्ञान नहीं है।
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि ट्रस्ट महासचिव चंपत राय प्रचारक जीवन में बहुत सरल थे। एक प्रशासक की भूमिका मिलने पर कार्यकर्ता को समय-समय पर नरम-गरम दोनों रहना पड़ता है। इसके लिए कोई उन्हें अहंकारी कह सकता है।

