चंपत राय के पक्ष में अयोध्या के संतों की लामबंदी, राम मंदिर दान चोरी को बताया विपक्ष का एजेंडा

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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर संतों की मैराथन गोष्ठी में समूचे संत समाज ने माना कि इस प्रकरण को एजेंडे के रूप में प्रचारित कर अयोध्या को बदनाम करने की साजिश हुई। संत समाज राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपतराय के समर्थन में पूरी दृढ़ता के साथ खड़ा नजर आया। संतों का स्पष्ट मत था कि चढ़ावा चोरी की घटना को राष्ट्रीय स्तर पर एक निर्धारित एजेंडे के रूप में प्रचारित कर अयोध्या, राम मंदिर व संत समाज को बदनाम करने की साज़िश की गई। संतों ने कहा कि विपक्षी राजनीतिक दलों ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाज में भ्रांति फैलाने की कोशिश की।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए मणिराम छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने कहा कि घटना में शामिल लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा प्रदेश सरकार के द्वारा गठित एसआईटी की जांच चल रही है तो वह लोग न्यायाधीश बनकर सामने आ गये जिन्हें रामलला व राम मंदिर से कोई लेना-देना ही नहीं था।

धार्मिक न्यास समिति सदस्य व हनुमत निवास के महंत मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को टिप्पणी बहुत समीचीन है लेकिन जिन लोगों को अयोध्या में राम मंदिर बन जाने की पीड़ा है, उन्हें तो राजनीति करनी ही है। इसलिए सुनियोजित तरीके से चरित्र हनन का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में एक विशेष समूह के द्वारा सभी संवैधानिक संस्थाओं को खारिज कर उनके दिमाग में जहर घोलने का काम किया जा रहा है। इससे षड्यंत्र को समझने और सावधान रहने की आवश्यकता है।

धार्मिक न्यास समिति के दूसरे सदस्य व श्रीराम वल्लभा कुंज के अधिकारी स्वामी राजकुमार दास ने कहा कि संत समाज पूरी तरह एक जुट है और उसकी मान्यता है कि चंपतराय के पर किसी तरह के शंका की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि आज वह लोग राम मंदिर को लेकर चिंता जता रहे हैं जो कि राम मंदिर में दर्शन करने नहीं आए और मंदिर निर्माण का विरोध कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह अयोध्या को बदनाम करने का षड्यंत्र है और इससे सबको सावधान रहना होगा। इसी रामकथा कुंज के पीठाधीश्वर डा. रामानंद दास ने भी उन्हें बेदाग बताया। इसके पहले नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने सभी नव नियुक्त सदस्यों को अंगवस्त्र भेंट कर उनका सम्मान किया।

संगोष्ठी में दिगम्बर अखाड़ा के महंत राम-लखन दास, निर्वाणी अखाड़ा महंत मुरली दास, बावन मंदिर महंत वैदेही वल्लभ शरण, उदासीन आश्रम महंत डा. भरत दास, महंत जनार्दन दास, संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास, महंत हेमंत दास, महंत छविराम दास, महंत गिरीश दास, महंत शशिकांत दास, महंत मनीष दास, महंत जयराम दास, महंत राघवेश दास वेदांती, महंत सत्येन्द्र दास, महंत रामानुज शरण व महंत श्यामसुंदर दास सहित अन्य संत मौजूद रहे।

मणिराम छावनी में गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से आयोजित संतों की संगोष्ठी में संघ के सर सह कार्यवाह डा कृष्ण गोपाल व अखिल भारतीय अधिकारी भैय्या जी जोशी नहीं पहुंचे। इस मौके पर संघ के प्रांत प्रचारक कौशल , विहिप के केन्द्रीय संरक्षक दिनेश , राष्ट्रीय महामंत्री बीएल बांगड़ा, केन्द्रीय मंत्री अशोक तिवारी, पूर्वी क्षेत्र संगठन मंत्री गजेन्द्र सिंह, महानगर प्रचारक सुदीप, विहिप के साकेत विभाग संयोजक धीरेश्वर वर्मा व अन्य मौजूद रहे।

राम मंदिर में रामलला के सुगम दर्शन के लिए संतों के लिए वैकल्पिक मार्ग तय किया जाएगा। संतों की संगोष्ठी में इस विषय पर कई संतों ने चर्चा की। इसके बाद ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य व धार्मिक न्यास समिति सदस्य महंत कमलनयन दास ने उन्हें यह आश्वासन दिया। समिति के सदस्य स्वामी राजकुमार दास ने कहा कि जहां तक रामलला की विधिपूर्वक पूजा अर्चना का सवाल है, वह पहले से हो रहा है। यदि आवश्यक होगा तो उसे कराने की कोशिश की जाएगी।

 

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