राम मंदिर में वीआईपी दर्शन पास में पेच, 1500 का कोटा, 150 भी नहीं हो रहे जारी

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अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी की घटना के बाद से प्रबंधन संभालने वाले श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट में उथल-पुथल मची हुई है। चंपत राय के इस्तीफा देने के बाद उनकी जगह कृष्णमोहन अंतरिम महासचिव बन गए हैं। दान की गणना में कई बदलाव भी कर दिए गए हैं। उस पर अब पहले से ज्यादा नजर रखी जा रही है। लेकिन अन्य व्यवस्थाएं अभी ठीक से नहीं हो पा रही हैं। इन व्यवस्थाओं में सुगम दर्शन पास और वीआईपी पास की व्यवस्था भी है। पास की व्यवस्था पूरी तरह से डगमगाई हुई है। हाल यह है कि वीआईपी और सुगम दर्शन के करीब 1500 पास जारी हो सकते हैं लेकिन दस प्रतिशत भी नहीं जा हो रहे हैं। अनेक वीआईपी कभी सुग्रीव किला के तीर्थ यात्री सेवा केंद्र तो कभी रामकोट के तीर्थ क्षेत्र कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।

दरअसल मंदिर आने वाले 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग और उनके एक अटेंडेंट का पास तत्काल काउंटर पर बनाया जाता है। गोद में बच्चा होने की दशा में माता-पिता का तत्काल पास बनता है। यह दोनों पास तो पहले की तरह बन रहे हैं। इसके अलावा ऑनलाइन पास बन रहा है। यह पास दर्शन की तारीख से 15 दिन पहले साइट पर खुलता और बनता है।

सुगम दर्शन पास श्रद्धालुओं को अपने मोबाइल से खुद बनाना होता है। इसमें पास बनाने वाले की फोटो के अलावा सभी दर्शनार्थियों की आईडी देनी होती है। विशिष्ट और वीआईपी दर्शन पास में एक आईडी पर एक साथ आठ दर्शनार्थियों का पास बनता है। सामान्य दर्शन में एक साथ सिर्फ छह दर्शनार्थियों का ही पास बनाया जाता है। इसके साथ जिस व्यक्ति का पास एक बार बन गया तो दोबारा 72 घंटे पहले सामान्य दर्शन पास नहीं बन सकता है।

जानकारी का अभाव कह लीजिए या कुछ और, पहले भी यह पास उतने नहीं बनते थे। ज्यादातर पास चंपत राय, डॉक्टर अनिल मिश्रा और गोपाल राव के रेफरेंस पर ही बनाए जाते थे। इनके साथ लगी कर्मचारियों की टोली यह पूरा काम करती थी। तीनों के रेफरेंस पर पास जारी होते थे। अयोध्या के व्यापारी, अफसर, मीडिया के लोग इनसे ही संपर्क करके पास जारी कराते थे। अब तीनों का इस्तीफा होने और आईडी बंद होने से इनके रेफरेंस वाला पास बनना बंद हो गया है।

इस बारे में पास व्यवस्था के प्रभारी नरेंद्र बताते हैं कि चंपतराय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की आईडी बंद हो चुकी है। इन तीनों लोगों से करीब चालीस अलग-अलग कार्यकर्ताओं की टीम जुड़ी थी। यही लोग अलग-अलग रिफरेंस से पास के लिए आवेदन भेजते थे। आईडी बंद होने से इनके रेफरेंस पर पास बनना बंद हो गया है। तीन आईडी बंद होने के बाद अभी किसी नए ट्रस्टी की आईडी नहीं बनाई गयी है। इसके लिए कोई नया आदेश भी नहीं जारी किया गया है। आदेश जारी होने पर ही साफ्टवेयर में इसे फीड किया जाएगा।

इसके कारण नये महासचिव कृष्ण मोहन, ट्रस्टी और निर्मोही अखाड़ा महंत दिनेंद्र दास के साथ दूसरे ट्रस्टियों के नाम से पास जारी हो रहे हैं। इनका संपर्क भी अभी शहर के लोगों से कम है। कुछ पास सीआरपीएफ के अधिकारियों और एसएसएफ के अधिकृत अधिकारियों के माध्यम से भी जारी किया जा रहा है। हालांकि उनकी भी संख्या उतनी ज्यादा नहीं है। ऐसे में बहुत कम पास जारी हो रहे हैं।

 

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