August 19, 2026

राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय की होगी वापसी? क्यों होने लगी चर्चा, दो सितंबर को फैसले की उम्मीद

अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी के बाद इस्तीफा दे चुके चंपत राय की दोबारा ट्रस्ट में वापसी की चर्चा तेज हो गई है। एक दिन पहले ही चढ़ावा चोरी की जांच के लिए बनी एसआईटी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी थी। शासन से यह रिपोर्ट ट्रस्ट को मिली और उस पर परीक्षण भी शुरू हो गया है। रिपोर्ट में पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिल गई है। रिपोर्ट के बाद ही ट्रस्ट में दोनों की वापसी की चर्चा तेज हो चुकी है। ट्रस्ट में अब भी तीन पद खाली हैं। ऐसे में चंपत राय के दोबारा ट्रस्टी चुन लेने के आसार नजर आ रहे हैं। दो सितंबर को ट्रस्ट की बैठक भी प्रस्तावित है।

बताया जाता है कि ट्रस्ट में इस बात की चर्चा हो रही है कि चढ़ावा चोरी में चंपत राय की कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी और जांच के दौरान उन्हें इस अपराध से जोड़ने वाला कोई सबूत भी नहीं मिला है। चंपत राय के बेहद करीबी टिन्नू यादव भले गिरफ्तार हुआ है लेकिन राय की इसमें कोई भूमिका एसआईटी को भी नहीं मिली है।

कहा जा रहा है कि अयोध्या के काफी संत भी चंपत राय के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि कि पिछले दिनों जो कुछ भी हुआ सब ग्रह दशाओं का खेल था, लेकिन ईश्वरीय न्याय हो गया है। पिछले कुछ दिनों से चंपत राय एक बार फिर एक्टिव भी दिखाई दिए। संतों से मुलाकात कर रहे हैं। चोरी के आरोपों में घिरने के बाद भले ही उन्होंने इस्तीफा दिया था लेकिन यह भी कहा था कि कलंक लेकर अयोध्या से वापस नहीं जाऊंगा। इसके अलावा उन्होंने एसआईटी रिपोर्ट आने के बाद अपना पक्ष सार्वजनिक करने का भी ऐलान किया था। हालांकि संगठन के शीर्ष नेताओं के मान-मनौव्वल पर उन्होंने फिलहाल मौन धारण किया हुआ है। कहा जा रहा है कि उन्होंने अपना ध्यान अनुष्ठान में लगाया हुआ है।

ट्रस्ट में 15 सदस्यीय कार्यकारिणी में तीन ट्रस्टियों के पद रिक्त हैं। इन पदों को लेकर संघ और विहिप के बीच सहमति बनी थी कि संघ या विहिप के किसी व्यक्ति की जगह विहिप पदाधिकारी शामिल होगा। इस लिहाज विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में चंपत की वापसी से संगठन भी सहमत है। हालांकि संघ का शीर्ष नेतृत्व तय करेगा कि डा. अनिल मिश्र का भविष्य क्या होगा? तीन में दो पद चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे और तीसरा अयोध्या नरेश विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र के दिवंगत होने के बाद से रिक्त चला आ रहा है।

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