गोरखपुर के प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. राम रतन बनर्जी का निधन
वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक और समाजसेवी डा. राम रतन बनर्जी का शनिवार को दिन में 11 बजे निधन हो गया। उनके पुत्र डा. रूप कुमार बनर्जी ने इसकी जानकारी दी। उनका अंतिम संस्कार गोरखपुर में ही किया जाएगा।
डा. बनर्जी के निधन से चिकित्सा जगत और बंगाली समाज में शोक की लहर है। वह चिकित्सा को महज पेशा नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सेवा का माध्यम मानते थे। छह दशक से अधिक समय तक उन्होंने अपनी इसी सोच के साथ मरीजों का उपचार किया और समाज में मानवीय मूल्यों की मिसाल कायम की।
कोलकाता से होम्योपैथी की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद डा. राम रतन बनर्जी ने वर्ष 1959 से चिकित्सा सेवा शुरू की। बेनीगंज-दुर्गाबाड़ी क्षेत्र स्थित संतोष होमियो सेवाश्रम उनकी सेवा साधना का प्रमुख केंद्र बना। यहां आर्थिक रूप से कमजोर, असहाय और वंचित परिवारों के मरीजों का नाममात्र शुल्क पर या निश्शुल्क इलाज किया जाता था। उनका प्रयास रहता था कि पैसे के अभाव में किसी जरूरतमंद को उपचार से वंचित न होना पड़े।
पूर्वांचल के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में मरीज उनके पास पहुंचते थे। चर्म रोग, पक्षाघात, मधुमेह और श्वास संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीज उनसे उपचार की उम्मीद लेकर आते थे। उम्र बढ़ने के बाद भी मरीजों के प्रति उनका समर्पण कम नहीं हुआ। 80 वर्ष से अधिक आयु में भी वह प्रतिदिन 10 से 12 घंटे तक क्लीनिक में बैठकर मरीजों को देखते रहे। उनकी यह दिनचर्या चिकित्सा के प्रति निष्ठा और सेवाभाव का उदाहरण बनी।
चिकित्सा क्षेत्र में उनके लंबे योगदान और समाजसेवा को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें प्रदेश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल ‘यश भारती’ से सम्मानित किया था। गोरखपुर के बंगाली समाज, दुर्गाबाड़ी न्यास और स्थानीय सांस्कृतिक व धार्मिक गतिविधियों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही। वह सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में सहयोग तथा मार्गदर्शन देते थे।
डा. राम रतन बनर्जी का जीवन इस बात की मिसाल रहा कि चिकित्सा का वास्तविक उद्देश्य केवल रोग का उपचार नहीं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति को सहारा देना भी है। उनके निधन से गोरखपुर ने ऐसे चिकित्सक को खो दिया, जिनकी पहचान उनके पेशेवर ज्ञान के साथ जरूरतमंदों के प्रति संवेदना और सेवा भावना से भी थी।
